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“जब सुनवाई नहीं होती, तब सड़क ही आख़िरी आवाज़ बनती है”: नकली डेयरी उत्पादों के खिलाफ अमृतसर में दोधी यूनियन का उग्र प्रदर्शन

एक तरफ प्रशासन लगातार यह दावा कर रहा है कि मिलावटखोरों और नकली खाद्य पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर पंजाब के Amritsar में डेयरी कारोबार से जुड़े लोगों का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। सोमवार को अमृतसर की दोधी यूनियन ने जिला प्रशासन के खिलाफ डीसी दफ्तर के बाहर जोरदार रोष प्रदर्शन किया। प्रदर्शन इतना उग्र था कि यूनियन सदस्यों ने क्विंटल के हिसाब से दूध सड़क पर बहा दिया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई और डीसी कार्यालय आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

यह प्रदर्शन केवल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी नहीं था, बल्कि उन डेयरी कारोबारियों की हताशा और गुस्से का प्रतीक भी था, जो लंबे समय से नकली पनीर, सिंथेटिक खोया और मिलावटी डेयरी उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती, तब विरोध का यही तरीका बचता है जिससे प्रशासन और समाज दोनों का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर जाए।

दोधी यूनियन के प्रधान Ranjit Singh ने आरोप लगाया कि अमृतसर जिले में दर्जनों फैक्ट्रियां खुलेआम नकली पनीर और नकली खोया तैयार कर रही हैं। उनके मुताबिक बाजार में 150 से 200 रुपये किलो तक पनीर बेचा जा रहा है, जबकि असली दूध से तैयार गुणवत्तापूर्ण पनीर बनाने की लागत ही 430 से 600 रुपये प्रति किलो तक पहुंचती है। उनका कहना था कि इतने कम दाम पर बिकने वाला उत्पाद स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा करता है और यह सीधे तौर पर मिलावट और नकली उत्पादन की ओर इशारा करता है।

उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे को लेकर कई बार सिविल सर्जन कार्यालय और जिला प्रशासन को शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यूनियन नेताओं का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण असली डेयरी कारोबार प्रभावित हो रहा है, जबकि मिलावटखोर खुलेआम बाजार पर कब्जा जमाते जा रहे हैं।

प्रदर्शन के दौरान सड़क पर बहाए गए दूध की तस्वीरें और वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर भी वायरल हुए। कुछ लोगों ने इसे खाद्य पदार्थों की बर्बादी बताते हुए आलोचना की, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनका उद्देश्य किसी संसाधन को नष्ट करना नहीं, बल्कि व्यवस्था को झकझोरना था। यूनियन सदस्यों का तर्क था कि जब महीनों तक ज्ञापन देने, शिकायत करने और अधिकारियों से मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती, तब सार्वजनिक प्रदर्शन ही आखिरी रास्ता बचता है।

यह मामला केवल डेयरी कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं की सेहत से भी सीधे जुड़ा हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार नकली पनीर और सिंथेटिक डेयरी उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले रसायन और घटिया सामग्री स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। खासकर त्योहारों और शादी के सीजन में नकली डेयरी उत्पादों की मांग और सप्लाई दोनों बढ़ जाती हैं, जिससे बाजार में मिलावट का खतरा और अधिक बढ़ जाता है।

प्रशासन की ओर से फिलहाल इस प्रदर्शन पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह घटना एक बार फिर उस सवाल को केंद्र में ले आई है कि क्या खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल दावे पर्याप्त हैं या जमीनी स्तर पर कठोर और पारदर्शी कार्रवाई की भी आवश्यकता है।

अमृतसर में हुआ यह विरोध प्रदर्शन केवल दूध बहाने की घटना नहीं, बल्कि उस बढ़ती बेचैनी का संकेत है जिसमें कारोबारियों को लगता है कि उनकी आवाज़ व्यवस्था तक नहीं पहुंच रही। और जब व्यवस्था चुप दिखाई देती है, तब सड़कें ही विरोध की सबसे तेज़ आवाज़ बन जाती हैं।

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