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पंजाब में भीषण गर्मी का असर, स्कूलों और सरकारी दफ्तरों का समय बदला, बच्चों और कर्मचारियों को लू से बचाने की तैयारी

पंजाब में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और हीट वेव ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है। राज्य के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने के बाद सरकार ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। बढ़ती गर्मी, तेज धूप और लू के खतरे को देखते हुए पंजाब सरकार ने स्कूलों और सरकारी दफ्तरों के समय में बदलाव करने का फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम बच्चों, शिक्षकों और कर्मचारियों को अत्यधिक गर्मी के प्रभाव से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस फैसले की जानकारी साझा करते हुए बताया कि 25 मई से पूरे राज्य में स्कूलों और सरकारी कार्यालयों का समय बदला जाएगा। नए आदेशों के अनुसार अब स्कूल और सरकारी दफ्तर सुबह 7:30 बजे खुलेंगे और दोपहर 1:30 बजे बंद कर दिए जाएंगे। इस बदलाव के बाद सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी अवधि भी आठ घंटे से घटकर लगभग छह घंटे रह जाएगी।

सरकार का मानना है कि दोपहर के समय बढ़ती तपिश और हीट वेव का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वाले लोगों पर पड़ता है। पिछले कुछ दिनों से पंजाब के कई हिस्सों में तापमान लगातार सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर भारत में सक्रिय गर्म हवाओं और सूखे मौसम के कारण पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कई क्षेत्रों में हीट वेव की स्थिति बनी हुई है।

मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में गर्मी से तत्काल राहत मिलने की संभावना कम जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सुबह के समय तापमान अपेक्षाकृत कम रहने के कारण स्कूल और दफ्तर जल्दी शुरू करने का निर्णय स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोपहर के समय सड़कों और खुले इलाकों में तापमान अत्यधिक बढ़ने से हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और थकावट के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों ने सरकार के इस कदम को राहत भरा फैसला बताया है। पिछले कई दिनों से अभिभावक स्कूल समय में बदलाव या छुट्टियों की मांग कर रहे थे। हालांकि सरकार ने फिलहाल स्कूल बंद करने के बजाय समय परिवर्तन का रास्ता चुना है ताकि पढ़ाई भी प्रभावित न हो और बच्चों को भीषण गर्मी से भी बचाया जा सके।

सरकारी कर्मचारियों के बीच भी इस फैसले को लेकर चर्चा तेज है। कई कर्मचारी संगठनों का कहना है कि दोपहर की भीषण गर्मी में काम करना मुश्किल हो रहा था, विशेषकर उन कर्मचारियों के लिए जिन्हें फील्ड ड्यूटी या सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े कार्य करने पड़ते हैं। ऐसे में कम समय की ड्यूटी और सुबह जल्दी काम शुरू करने का फैसला राहत देने वाला माना जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी लोगों को गर्मी के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि तेज धूप में लंबे समय तक रहने से शरीर में पानी की कमी, चक्कर आना, सिरदर्द और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है।

पंजाब में इस वर्ष गर्मी ने सामान्य से पहले ही तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। कई शहरों में सुबह से ही गर्म हवाएं चल रही हैं और दोपहर तक सड़कें लगभग सुनसान दिखाई देने लगी हैं। किसानों, मजदूरों और बाहर काम करने वाले लोगों पर इसका सबसे अधिक असर देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ते तापमान के कारण आने वाले वर्षों में इस प्रकार की परिस्थितियां और गंभीर हो सकती हैं। ऐसे में राज्यों को केवल अस्थायी राहत उपायों तक सीमित न रहकर दीर्घकालिक हीट एक्शन प्लान, शहरी हरियाली, जल संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी काम करना होगा।

फिलहाल पंजाब सरकार का यह फैसला बढ़ती गर्मी के बीच तत्काल राहत देने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति को देखते हुए सरकार आगे और फैसले भी ले सकती है।

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