हरियाणा सरकार ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर 30 दिन की पैरोल दे दी है। रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहे राम रहीम मंगलवार सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच जेल से बाहर आए और सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय के लिए रवाना हो गए। बताया जा रहा है कि सुबह करीब 6 बजकर 34 मिनट पर उन्हें चुपचाप जेल से बाहर निकाला गया।
गौरतलब है कि साध्वियों के यौन शोषण और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद अगस्त 2017 से गुरमीत राम रहीम जेल में बंद हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में उन्हें कई बार पैरोल और फरलो मिल चुकी है। जानकारी के अनुसार, बीते करीब नौ वर्षों में वह 16वीं बार जेल से बाहर आए हैं और कुल मिलाकर लगभग 430 दिन जेल से बाहर रह चुके हैं।
इस वर्ष 2026 में यह दूसरी बार है जब राम रहीम को जेल से राहत मिली है। इससे पहले जनवरी में भी उन्हें 40 दिन की पैरोल दी गई थी और फरवरी में वह वापस जेल लौटे थे। अब एक बार फिर पैरोल मिलने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
सूत्रों के मुताबिक, इस बार पैरोल के दौरान कुछ शर्तें भी लगाई गई हैं। उन्हें सार्वजनिक सभा, राजनीतिक गतिविधियों या बड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही उन्हें डेरे के बाहर जाने पर भी प्रतिबंध रहेगा।
पैरोल को लेकर विपक्षी दल और सामाजिक संगठनों की ओर से पहले भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि चुनावी माहौल या राजनीतिक परिस्थितियों के दौरान बार-बार पैरोल मिलना कई तरह के सवाल खड़े करता है। वहीं समर्थकों का तर्क है कि जेल नियमों के तहत अच्छे आचरण वाले कैदियों को पैरोल और फरलो मिलना एक कानूनी प्रक्रिया है।
जेल नियमों के अनुसार किसी भी कैदी को निर्धारित अवधि के भीतर पैरोल और फरलो का लाभ दिया जा सकता है। बताया जा रहा है कि इस वर्ष राम रहीम की कुल पैरोल और फरलो अवधि लगभग 70 दिनों तक पहुंच सकती है।
फिलहाल सिरसा डेरे में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
