भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुग ने कांग्रेस और इंडिपेंडेंट गणित वाले गठबंधन पर कठोर हमला करते हुए चुनाव आयोग तथा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों को लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का प्रयास करार दिया।
चुग ने कहा कि चुनाव आयोग भारतीय संविधान के तहत कार्य करने वाली एक स्वतंत्र संस्थान है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलता है। बिना ठोस प्रमाण के विदेशी टूलकिट जैसे आरोपों के आधार पर आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना अब सुनियोजित तरीके से लोकतंत्र में अविश्वास फैलाने की रणनीति बन चुकी है। उनके मुताबिक राहुल गांधी नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा संस्थाओं को बार-बार कटघरे में खड़ा करना जनता के बीच भ्रम और अस्थिरता पैदा करने जैसा है।
मतदाता सूची शुद्धिकरण का बचाव
तरुण चुग ने SIR प्रक्रिया के मकसद को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य मतदाता सूची को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है — फर्जी वोट, डुप्लीकेट नाम, अवैध प्रविष्टियों और घुसपैठियों की पहचान और उनका निष्कासन। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस व उसके सहयोगी इन अनियमितताओं के प्रति नरम रवैया क्यों अपनाते हैं और उनका कहा कि जिनकी राजनीति संदिग्ध वोट बैंकों पर टिकी हो, वे ही शुद्धिकरण का विरोध कर रहे हैं।
कांग्रेस पर आंतरिक टूटे की आलोचना
चुग ने कांग्रेस के अंदरुनी हालात पर भी तीखा प्रहार किया और दावा किया कि पार्टी अब राष्ट्रीय संगठन की बजाय विभिन्न गुटों और जातीय समीकरणों में बंटी हुई नजर आती है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की जगह पर अब क्षेत्रीय गुट और हाईकमान के चक्रव्यूह में रमी नेताओं का कब्ज़ा है। तरुण चुग ने यह भी कहा कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के संकेत इस बात के प्रमाण हैं कि पार्टी में जाति-आधारित भेदभाव और गुटबाजी बढ़ी है।
आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ का संदेश
गुजरात एटीएस की जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क पर कार्रवाई की सराहना करते हुए चुग ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली सरकार की आतंकवाद विरोधी नीतियों का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों के मुकाबले अब सुरक्षा बलों के साथ स्पष्ट कार्रवाई का दौर है और आतंकी गतिविधियों के संबंध में कोई नरमी बर्दाश्त नहीं कि जाएगी। चुग ने चेतावनी दी कि देश के भीतर सक्रिय स्लीपर सेल और उनके सहयोगियों के खिलाफ भी प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
यह टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है जब चुनावी प्रक्रिया, संस्थागत निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था पर सार्वजनिक बहस तेज है।
