पंजाब में विधानसभा चुनावों की आहट के साथ राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दल अब आक्रामक रणनीति के साथ चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। इसी बीच वर्षों पुराने बेअदबी मामले की जांच ने एक बार फिर राज्य की राजनीति को नई दिशा दे दी है।
मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है। सूत्रों के अनुसार, उनसे सोमवार को पूछताछ की जाएगी। माना जा रहा है कि यह पूछताछ जांच के एक महत्वपूर्ण चरण का हिस्सा होगी।
जांच की दिशा में नया मोड़ उस समय आया जब भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला ने कथित तौर पर उस प्रतिनिधिमंडल से जुड़े दस्तावेज पर अपने हस्ताक्षर होने से इनकार किया, जो बेअदबी मामले को लेकर तत्कालीन राज्यपाल को सौंपा गया था। इस घटनाक्रम के बाद एसआईटी ने मामले से जुड़े तथ्यों की दोबारा पड़ताल शुरू की है।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, उस समय हुए विरोध प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा पुलिस नेतृत्व के स्तर पर बातचीत हुई थी। पूर्व अकाली विधायक मनतार बराड़ के साथ हुई चर्चाओं का भी जांच के दौरान उल्लेख सामने आया है।
इसी क्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के कार्यालय से जुड़े एक पूर्व अधिकारी (ओएसडी) ने भी कथित तौर पर यह पुष्टि की है कि प्रदर्शनकारियों को हटाने के संबंध में देर रात निर्देश जारी किए गए थे। हालांकि इन दावों की जांच अभी जारी है और एसआईटी सभी उपलब्ध दस्तावेजों, बयानों तथा परिस्थितियों का मिलान कर रही है।
बेअदबी का मुद्दा लंबे समय से पंजाब की राजनीति का सबसे संवेदनशील और भावनात्मक विषय रहा है। चुनावी माहौल में इस मामले की जांच में आई नई तेजी ने राजनीतिक बहस को फिर केंद्र में ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में एसआईटी की कार्रवाई और उससे निकलने वाले निष्कर्ष चुनावी विमर्श को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल सभी की नजरें सोमवार को होने वाली पूछताछ पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के दौरान सामने आने वाले नए तथ्य इस बहुचर्चित मामले को किस दिशा में ले जाते हैं और पंजाब की चुनावी राजनीति पर इसका कितना प्रभाव पड़ता है।
