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गन्नौर में 30 अगस्त की ‘पंजाब बचाओ रैली’ की तैयारी तेज, गांव-गांव पहुंचकर सरबजीत सिंह झिंझर ने जुटाया समर्थन

गन्नौर। पंजाब की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियां धीरे-धीरे तेज होती जा रही हैं। इसी राजनीतिक माहौल के बीच शिरोमणि अकाली दल ने गन्नौर विधानसभा क्षेत्र में संगठनात्मक गतिविधियों को बढ़ाते हुए 30 अगस्त को होने वाली ‘पंजाब बचाओ रैली’ के लिए जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है। यूथ अकाली दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और गन्नौर हलके के प्रभारी सरबजीत सिंह झिंझर ने बुधवार को क्षेत्र के कई गांवों का दौरा कर लोगों से रैली में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की।

झिंझर ने सबदलपुर, अमीरपुर, जैनगर, भैड़वाल, भैड़वाल झुंगियां, मंडवाल, खानपुर, अलीपुर, खंडेली, भद्दक, गाजीपुर, खेड़ी गांदियां, खानपुर गांदियां, जखरां, ढिंडसा और बडोली गुजरां समेत कई गांवों में बैठकें कीं। इन बैठकों में उन्होंने स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संवाद किया और 30 अगस्त को गन्नौर की दाना मंडी में प्रस्तावित रैली को सफल बनाने के लिए अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

शिरोमणि अकाली दल के अनुसार, रैली में पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल सहित वरिष्ठ नेता और प्रमुख पदाधिकारी हिस्सा लेंगे। पार्टी इस आयोजन के जरिए पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ अपने राजनीतिक अभियान को और धार देने की तैयारी में है। झिंझर ने कहा कि रैली का मुख्य उद्देश्य राज्य में मौजूदा सरकार के कामकाज को लेकर जनता के बीच राजनीतिक बहस को तेज करना है।

अपने गांव दौरे के दौरान झिंझर ने कानून-व्यवस्था, नशे की समस्या, बेरोजगारी और चुनावी वादों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रही है और प्रदेश के सामने मौजूद कई गंभीर समस्याओं का प्रभावी समाधान नहीं हो सका है।

हालांकि ये आरोप अकाली दल की राजनीतिक स्थिति और अभियान का हिस्सा हैं, लेकिन इस पूरे अभियान का महत्व इस बात में भी है कि प्रमुख विपक्षी दल अब 2027 के विधानसभा चुनावों से काफी पहले अपने संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने की कोशिश कर रहे हैं। गांवों में लगातार बैठकें और कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क इसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।

झिंझर ने कहा कि गांव-गांव लोगों से मिलते समय उन्हें जिस तरह की प्रतिक्रिया मिल रही है, वह आम आदमी पार्टी सरकार के प्रति कथित असंतोष और अकाली दल के प्रति दोबारा बढ़ते भरोसे का संकेत है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे केवल रैली तक सीमित न रहें, बल्कि स्थानीय स्तर पर लोगों से लगातार संपर्क बनाए रखें और उनके मुद्दों को पार्टी के राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनाएं।

अकाली दल के लिए गन्नौर की रैली इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी पंजाब में अपनी राजनीतिक जमीन को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के उभार के बाद राज्य की पारंपरिक राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव आया था। ऐसे में अकाली दल के सामने संगठन को पुनर्जीवित करने, मतदाताओं से दोबारा जुड़ने और अपने राजनीतिक एजेंडे को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की चुनौती है।

झिंझर ने कहा कि 30 अगस्त की रैली को सफल बनाने के लिए गांव स्तर पर पार्टी कार्यकर्ता लगातार काम कर रहे हैं। उनका दावा है कि रैली में गन्नौर हलके से बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे और यह आयोजन राज्य की राजनीति में अकाली दल की सक्रिय वापसी का संदेश देगा।

रैली के जरिए अकाली दल जिस तरह से कानून-व्यवस्था, नशे, रोजगार और सरकार के वादों को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है, उससे साफ है कि पार्टी आगामी चुनावी मुकाबले में शासन के प्रदर्शन को प्रमुख मुद्दों में शामिल करना चाहती है। दूसरी ओर, इस अभियान की वास्तविक राजनीतिक ताकत का आकलन रैली में जुटने वाली भीड़ से अधिक इस बात से होगा कि पार्टी इन मुद्दों को लगातार जनसंपर्क और संगठनात्मक अभियान में कितनी मजबूती से बदल पाती है।

30 अगस्त को गन्नौर दाना मंडी में होने वाली ‘पंजाब बचाओ रैली’ अब अकाली दल के लिए महज एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि क्षेत्र में अपनी संगठनात्मक पकड़ और जनसमर्थन को परखने का महत्वपूर्ण अवसर बनती दिखाई दे रही है। आने वाले महीनों में पंजाब की राजनीति में 2027 की चुनावी दिशा को लेकर गतिविधियां और तेज होने की संभावना है और गन्नौर की यह रैली उसी लंबे राजनीतिक अभियान की शुरुआती महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक हो सकती है।

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