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लुधियाना में पाकिस्तान के लिए कथित जासूसी का खुलासा, जूते की दुकान से CCTV की लाइव फीड भेजने का आरोप

लुधियाना । पंजाब पुलिस ने लुधियाना में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े कथित जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा किया है। पुलिस ने गुरदासपुर के फतेहगढ़ चूड़ियां क्षेत्र के रहने वाले रछपाल सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने लुधियाना-फिरोजपुर मार्ग पर किराये की एक जूते की दुकान की आड़ में सड़क की निगरानी के लिए CCTV कैमरे लगाए और उनकी लाइव फीड पाकिस्तान में मौजूद कथित हैंडलरों तक पहुंचाई।

पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई 27 अगस्त को मिली गुप्त सूचना के आधार पर लुधियाना कमिश्नरेट पुलिस और काउंटर-इंटेलिजेंस की संयुक्त टीम ने की। आरोपी को उसकी दुकान से पकड़ा गया। उसके कब्जे से दो CCTV कैमरे, एक Wi-Fi राउटर, पावर एडाप्टर और 64 GB का मेमोरी कार्ड बरामद किए जाने की बात पुलिस ने कही है। मामले में सराभा नगर थाने में Official Secrets Act और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। अदालत ने आरोपी को छह दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है।

पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा के मुताबिक, आरोपी ने न्यू सुंदर नगर में एक अस्पताल के सामने दुकान किराये पर ली थी। यह जगह लुधियाना-फिरोजपुर नेशनल हाईवे पर स्थित है। जांचकर्ताओं के लिए इस जगह की लोकेशन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बद्दोवाल क्षेत्र के सैन्य प्रतिष्ठानों से कुछ किलोमीटर की दूरी पर है।

पुलिस का आरोप है कि दुकान के बाहर लगाए गए कैमरों का रुख मुख्य सड़क की ओर था और इनके जरिये पाकिस्तान में बैठे कथित ऑपरेटरों को लाइव स्ट्रीमिंग की सुविधा दी गई। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कैमरों की फीड वास्तव में किन लोगों तक पहुंच रही थी, कितने समय तक यह व्यवस्था सक्रिय रही और इस माध्यम से किस तरह की जानकारी कथित तौर पर साझा की गई।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने जिस दुकान को किराये पर लिया था, उसका कारोबार सामान्य तरीके से नहीं चल रहा था। पुलिस के अनुसार, वह दुकान नियमित रूप से नहीं खोलता था। इसके बावजूद वहां निगरानी के लिए CCTV व्यवस्था स्थापित की गई थी। इस असामान्य गतिविधि ने जांचकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया।

पूछताछ के दौरान पुलिस को कथित तौर पर यह जानकारी मिली है कि दुकान को एक विशेष उद्देश्य से किराये पर लिया गया था। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, काउंटर-इंटेलिजेंस अधिकारियों ने दावा किया कि आरोपी ने पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के निर्देश पर दुकान ली थी और इसके लिए उसे कथित तौर पर करीब 40,000 रुपये मासिक किराया देना पड़ता था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि उसे इस पूरे काम के लिए लगभग तीन लाख रुपये मिले थे या नहीं।

हालांकि, इन दावों को फिलहाल पुलिस जांच के हिस्से के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अदालत में आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है।

मामले का एक और गंभीर पहलू यह है कि जांच एजेंसियां CCTV फुटेज के संभावित इस्तेमाल को केवल सामान्य निगरानी तक सीमित नहीं मान रही हैं। पुलिस को संदेह है कि कैमरों के जरिए सुरक्षा प्रतिष्ठानों और सैन्य वाहनों की आवाजाही पर नजर रखी जा सकती थी। लुधियाना-फिरोजपुर मार्ग की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए इस संभावना ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

पुलिस ने यह भी आरोप लगाया है कि पाकिस्तान में बैठे कथित ऑपरेटरों ने इन कैमरों की लाइव फीड का इस्तेमाल सुरक्षा गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया। कुछ मोबाइल नंबरों के जरिये धमकियां दिए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। हालांकि, इन धमकियों का कथित जासूसी गतिविधियों से सीधा संबंध क्या था, इसकी जांच अभी जारी है।

अब जांच का एक बड़ा हिस्सा डिजिटल साक्ष्यों पर केंद्रित है। पुलिस और काउंटर-इंटेलिजेंस अधिकारी आरोपी के मोबाइल फोन, संपर्कों, इंटरनेट कनेक्शन, CCTV कैमरों के लॉग और कथित विदेशी संपर्कों की जांच कर रहे हैं। जांचकर्ताओं की कोशिश यह समझने की है कि आरोपी की पाकिस्तान स्थित कथित हैंडलरों से मुलाकात या संपर्क किस माध्यम से हुआ और क्या उसके अलावा कोई अन्य व्यक्ति भी इस नेटवर्क में शामिल था।

इस जांच में एक और कड़ी सामने आई है। हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार, पुलिस अब आरोपी के एक रिश्तेदार से भी पूछताछ करना चाहती है, जो फिलहाल एक अलग मामले में जेल में बंद है। जांचकर्ताओं को संदेह है कि इसी रिश्तेदार के माध्यम से रछपाल सिंह का पाकिस्तान स्थित कथित हैंडलरों से संपर्क स्थापित हुआ हो सकता है। पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट पर पूछताछ के लिए लाने की प्रक्रिया में है।

लुधियाना का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब पुलिस इससे पहले भी ऐसे मामलों में CCTV और डिजिटल निगरानी तकनीक के इस्तेमाल को लेकर कार्रवाई कर चुकी है। अप्रैल 2026 में पुलिस ने दावा किया था कि पाकिस्तान समर्थित कथित मॉड्यूल संवेदनशील सैन्य इलाकों की निगरानी के लिए SIM आधारित और सौर ऊर्जा से चलने वाले CCTV कैमरों का इस्तेमाल कर रहे थे। ऐसे मामलों से सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई चुनौती उभरती है—साधारण दिखने वाले डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल दूर बैठे ऑपरेटरों द्वारा संवेदनशील गतिविधियों की निगरानी के लिए किया जा सकता है।

लुधियाना मामले में चीन निर्मित CCTV कैमरों के इस्तेमाल का भी उल्लेख जांच रिपोर्टों में किया गया है। पुलिस की जांच इस बात पर केंद्रित है कि इन कैमरों को किस तरीके से इंटरनेट से जोड़ा गया था और क्या उनके यूजर आईडी तथा पासवर्ड कथित तौर पर सीमा पार बैठे लोगों के साथ साझा किए गए थे। फिलहाल पुलिस ने बरामद उपकरणों को तकनीकी जांच के लिए सुरक्षित किया है।

जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित तौर पर केवल लुधियाना की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी या पंजाब के दूसरे संवेदनशील स्थान भी इस नेटवर्क के निशाने पर थे। आरोपी के संपर्कों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल से इस सवाल का जवाब मिलने की उम्मीद है।

इस मामले में सबसे अहम सवाल अब यह है कि रछपाल सिंह अकेले काम कर रहा था या वह किसी बड़े नेटवर्क का स्थानीय हिस्सा था। यदि उसके डिजिटल संपर्क, वित्तीय लेनदेन और पूछताछ से अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है, तो जांच का दायरा लुधियाना से बाहर भी बढ़ सकता है।

पंजाब की भौगोलिक स्थिति और पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के कारण राज्य लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए संवेदनशील रहा है। ड्रोन के जरिये हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी से लेकर सीमा पार नेटवर्क के कथित इस्तेमाल तक, सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। CCTV जैसी सस्ती और आसानी से उपलब्ध तकनीक का कथित तौर पर जासूसी के लिए इस्तेमाल इस चुनौती का नया रूप सामने लाता है।

फिलहाल पुलिस के सामने प्राथमिकता यह स्थापित करना है कि कैमरों की लाइव फीड वास्तव में कहां पहुंच रही थी, कथित हैंडलर कौन थे और आरोपी ने किस स्तर की संवेदनशील जानकारी साझा की। साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि क्या इस गतिविधि के पीछे किसी बड़े हमले या तोड़फोड़ की योजना थी या मामला मुख्य रूप से निगरानी और सूचना एकत्र करने तक सीमित था।

रछपाल सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। लेकिन अगर पुलिस के दावे जांच में पुष्ट होते हैं, तो लुधियाना का यह मामला पंजाब में सीमा पार से संचालित कथित जासूसी नेटवर्क के बदलते तौर-तरीकों का गंभीर उदाहरण होगा—जहां एक छोटी सी दुकान, कुछ CCTV कैमरे और इंटरनेट कनेक्शन को कथित तौर पर संवेदनशील गतिविधियों पर नजर रखने के माध्यम में बदला गया।

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