पंजाब सरकार ने कृषि और औद्योगिक विकास के बीच बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में पहल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फसल अवशेष प्रबंधन, बागवानी और उद्योगों की जरूरत के मुताबिक कुशल कार्यबल तैयार करने जैसे मुद्दों पर उद्योग जगत के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है।
मुख्यमंत्री ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के साथ संभावित सहयोग पर चर्चा करते हुए फसल अवशेष यानी पराली के प्रबंधन को एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता के रूप में रखा। पंजाब में धान की कटाई के बाद पराली जलाने की घटनाएं लंबे समय से राज्य के सामने बड़ी पर्यावरणीय और राजनीतिक चुनौती रही हैं।
सरकार के सामने चुनौती यह है कि किसानों को केवल पराली न जलाने की अपील तक सीमित न रखा जाए, बल्कि फसल अवशेष के आर्थिक इस्तेमाल के स्थायी विकल्प भी विकसित किए जाएं। इसके लिए उद्योग, कृषि क्षेत्र और तकनीकी संस्थानों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बागवानी क्षेत्र में भी संभावनाओं पर जोर दिया। पंजाब में पारंपरिक गेहूं-धान चक्र पर कृषि निर्भरता कम करने तथा किसानों की आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने की चर्चा लंबे समय से होती रही है। बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्योग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इसके साथ ही सरकार उद्योगों की जरूरत के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर भी ध्यान दे रही है। पंजाब के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कौशल विकास और औद्योगिक निवेश के बीच बेहतर तालमेल को आवश्यक माना जा रहा है।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब भगवंत मान सरकार अपने कार्यकाल के अंतिम चरण में है और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। सरकार के लिए अब केवल कल्याणकारी योजनाओं को गिनाना पर्याप्त नहीं होगा; उसे रोजगार, निवेश, कृषि आय और पर्यावरण जैसे दीर्घकालिक मुद्दों पर ठोस परिणाम दिखाने होंगे।
पराली प्रबंधन पंजाब के लिए केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं है। यह किसानों की लागत, कृषि नीति, दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण और केंद्र-राज्य संबंधों से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए इस क्षेत्र में सरकार और उद्योग के बीच प्रभावी साझेदारी आने वाले वर्षों में पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
