धूरी (संगरूर) । पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार महिलाओं, किसानों, युवाओं और आम परिवारों को सीधे लाभ पहुंचाने तथा सरकारी संसाधनों को जनकल्याण पर खर्च करने की दिशा में काम कर रही है। संगरूर के बालियां गांव में आयोजित ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि 1 अक्टूबर को महिलाओं के मोबाइल फोन पर ‘मावां धियां सत्कार योजना’ के तहत वित्तीय सहायता की सूचना फिर पहुंचेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दलित महिलाओं को 1,000 रुपये मासिक देने के वादे के मुकाबले उनकी सरकार 1,500 रुपये प्रति माह की सहायता दे रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की योजनाओं का उद्देश्य परिवारों को सीधे आर्थिक सहयोग देना है, ताकि महिलाएं बच्चों की शिक्षा, घरेलू जरूरतों और अन्य आवश्यक खर्चों में इस राशि का इस्तेमाल कर सकें।
लोक मिलनी में मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के कामकाज को लेकर कई दावे किए और कहा कि पंजाब में शासन की प्राथमिकताओं को आम नागरिकों, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सिंचाई, बिजली, सड़कों और खेलों की ओर मोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का जोर इस बात पर है कि सार्वजनिक धन का इस्तेमाल ऐसी परियोजनाओं और योजनाओं में हो, जिनका लाभ सीधे लोगों तक पहुंचे।
भाजपा पर निशाना साधते हुए मान ने किसान आंदोलन के दौरान हुई मौतों का मुद्दा उठाया और सवाल किया कि 750 किसानों की मौत के बाद भाजपा पंजाब में आकर लोगों से समर्थन कैसे मांग सकती है। उन्होंने अकाली दल और भाजपा के बीच बदलते राजनीतिक समीकरणों का भी जिक्र किया और कहा कि पंजाब के मतदाता विभिन्न दलों के पुराने बयानों और राजनीतिक रुख को याद रखते हैं।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और अकाली दल पर भी राजनीतिक हितों के लिए पंजाब के लोगों को विभाजित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में राजनीतिक बहस अब स्कूलों, अस्पतालों, रोजगार, बिजली, सिंचाई, सड़कों, खेल ढांचे और युवाओं के अवसरों जैसे मुद्दों पर केंद्रित होनी चाहिए।
रोजगार के मुद्दे पर मान ने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में लगभग 71,000 सरकारी नौकरियां दी गई हैं और उनका दावा है कि भर्ती प्रक्रिया योग्यता के आधार पर हुई है। उन्होंने कहा कि रोजगार का अर्थ केवल सरकारी नौकरी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि युवाओं को आर्थिक स्वतंत्रता, सम्मान और अपने परिवारों की स्थिति बेहतर करने का अवसर देना भी है।
बिजली व्यवस्था का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2022 में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली की योजना लागू की गई थी, जिससे परिवारों को राहत मिली है। उन्होंने पंजाब के अपने बिजली उत्पादन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया और लहरा मोहब्बत स्थित गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल पावर प्लांट को राज्य की ऊर्जा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
मान ने कहा कि सरकार का उद्देश्य वित्तीय संसाधनों को ऐसे क्षेत्रों में लगाना है, जहां उनका प्रत्यक्ष सार्वजनिक लाभ हो। उनके अनुसार, यदि सरकारी धन का इस्तेमाल प्रभावी ढंग से किया जाए तो सड़क, स्कूल, अस्पताल, सिंचाई और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं को मजबूत किया जा सकता है।
पंजाब के गंभीर भूजल संकट का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने नहरी सिंचाई को बढ़ावा देने और कृषि की भूजल पर निर्भरता कम करने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में लगभग 14,000 किलोमीटर पाइपलाइनें बिछाई गई हैं और नहरी पानी के उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, नहरी सिंचाई का उपयोग लगभग 22 प्रतिशत से बढ़कर 88 प्रतिशत हो गया है और कुछ क्षेत्रों में भूजल स्तर में एक से पांच मीटर तक सुधार दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि पंजाब के जल संसाधनों को बचाना केवल किसानों का मुद्दा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है।
मान ने कहा कि सिंचाई ढांचे पर लगभग 6,700 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है और इसके माध्यम से पाइपलाइनों तथा खालों के निर्माण का काम आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि भूजल पर दबाव कम करने के लिए नहरी व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सरकार के कामकाज का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पंजाब ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ शिक्षकों को फिनलैंड, सिंगापुर और आईआईएम जैसे संस्थानों में प्रशिक्षण के अवसर दिए जा रहे हैं। उन्होंने स्कूल ऑफ एमिनेंस का भी उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए कहा कि 2026 के NEET परिणामों में पंजाब के सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने पात्रता हासिल की, जबकि 2021 में यह संख्या करीब 80 थी। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों के पीछे ऐसे परिवारों के बच्चे हैं, जिनके माता-पिता छोटे कारोबार, मजदूरी, रिक्शा चलाने या सब्जी बेचने जैसे काम करते हैं।
मान ने कहा कि शिक्षा और रोजगार सामाजिक तथा आर्थिक बदलाव के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उनके अनुसार, सरकारी स्कूलों का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर अवसर देना है, ताकि वे निजी संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें और डॉक्टर, इंजीनियर, अधिकारी तथा अन्य पेशेवर क्षेत्रों में आगे बढ़ सकें।
मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना’ का भी उल्लेख किया और कहा कि इसके तहत श्रद्धालुओं को देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों की यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाओं का उद्देश्य आम लोगों के लिए उन सुविधाओं और अवसरों को सुलभ बनाना है, जिन तक पहुंच कई परिवारों के लिए आर्थिक कारणों से कठिन हो सकती है।
मान ने कहा कि पंजाब की कई समस्याएं दशकों से चली आ रही हैं और उनका समाधान रातों-रात संभव नहीं है। उन्होंने सड़क, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और खेल बुनियादी ढांचे में सुधार को दीर्घकालिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि सरकार इन क्षेत्रों में काम जारी रखेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पंजाब के युवाओं को नशे और बेरोजगारी के बजाय शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और पेशेवर अवसरों की ओर बढ़ने के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराना जरूरी है।
कार्यक्रम के अंत में मान ने कहा कि राजनीतिक दलों के दावों का मूल्यांकन उनके काम और नीतियों के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों के प्रति सरकारों की जवाबदेही बनी रहनी चाहिए और शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सिंचाई, बिजली, सड़क, खेल तथा सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दों को शासन के केंद्र में रखा जाना चाहिए।