पंजाब में वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य लोगों पर लगाए गए कथित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) करेगा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को मामले की जांच CBI को सौंपते हुए एजेंसी को तत्काल FIR दर्ज कर जांच शुरू करने का निर्देश दिया है। अदालत ने जांच की प्रगति पर दो महीने के भीतर रिपोर्ट भी मांगी है।
मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपों की प्रकृति को देखते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है। अदालत ने पंजाब पुलिस की अब तक की कार्रवाई के तरीके पर भी संतोष व्यक्त नहीं किया और इसी आधार पर जांच CBI को सौंपने का निर्णय लिया।

अदालत ने अपने आदेश में CBI को मामले में FIR दर्ज कर तुरंत जांच आगे बढ़ाने को कहा। साथ ही पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस को जांच में CBI को पूरा सहयोग देने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला एक जनहित याचिका के आधार पर सामने आया है, जिसमें पंजाब सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों पर कथित तौर पर ‘ट्रांसफर के लिए नकद’, अनुकूल नीतियां हासिल करने के लिए कथित लेन-देन, टेंडर हासिल करने और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए गए थे।
याचिका दायर करने वाले वकील निखिल सराफ का दावा था कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 66(2) के तहत पंजाब सरकार और राज्य पुलिस को इस संबंध में संचार भेजा था, लेकिन आरोपों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
इस मामले की पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने ED से पंजाब के DGP को भेजे गए संचार को रिकॉर्ड पर रखने को कहा था। ED की ओर से अदालत को बताया गया था कि उसके जालंधर जोन ने 24 जुलाई, 31 जुलाई और 7 अगस्त 2026 को पंजाब के DGP को इस विषय में तीन अलग-अलग संचार भेजे थे।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि कथित भ्रष्टाचार का संबंध सरकारी अधिकारियों और मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कुछ निजी व्यक्तियों सहित विभिन्न लोगों से है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि कथित तौर पर IAS और पुलिस अधिकारियों सहित महत्वपूर्ण पदों पर तबादलों और नियुक्तियों को प्रभावित किया जा रहा था। इसके अलावा कुछ बिल्डरों, लैंड डेवलपर्स और कारोबारियों को टेंडर, परमिट और लाइसेंस दिलाने से जुड़े आरोप भी लगाए गए थे।
याचिका में एक कथित संगठित वसूली तंत्र का भी आरोप लगाया गया था, जिसमें लोगों को झूठे मामलों में फंसाने के माध्यम से दबाव बनाने की बात कही गई थी। हालांकि, ये सभी आरोप फिलहाल याचिका में किए गए दावे हैं और इनकी सत्यता जांच के बाद ही स्थापित हो सकेगी।
मामले में ED और पंजाब सरकार के रुख को लेकर भी हाईकोर्ट में पहले विस्तृत बहस हुई थी। ED की ओर से आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार ने उसके संचार पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की, जबकि पंजाब सरकार ने प्रक्रिया और ED की ओर से संचार भेजने में लगे समय को लेकर अपनी दलीलें रखी थीं।
अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच का जिम्मा CBI के पास है। एजेंसी को मामले में FIR दर्ज कर जांच आगे बढ़ानी होगी और दो महीने के भीतर अदालत को जांच के परिणाम की रिपोर्ट देनी होगी। यह आदेश पंजाब में सरकारी तबादलों, टेंडरों और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप के रूप में सामने आया है।