चंडीगढ़/संगरूर : पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार से जुड़े कथित ट्रांसफर-पोस्टिंग मामले ने मंगलवार को उस समय नया मोड़ ले लिया, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मुख्यमंत्री के चंडीगढ़ स्थित कैंप ऑफिस के साथ-साथ उनके OSD राजबीर सिंह घुम्मन के पैतृक आवास पर भी तलाशी अभियान चलाया। एक ही दिन में हुई इन कार्रवाइयों ने मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर और अधिक गंभीर बना दिया है।
CBI की टीम मंगलवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित हाउस नंबर 50 पहुंची। यह परिसर पंजाब के मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस-कम-गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल होता है। यहां केंद्रीय एजेंसी की टीम ने जांच से जुड़ी कार्रवाई की। कैंप ऑफिस के बाहर सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई थी।

इसी दौरान CBI की एक अलग टीम संगरूर जिले के घराचों गांव पहुंची, जहां मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुम्मन का पैतृक घर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इंस्पेक्टर राधेमन शर्मा के नेतृत्व में CBI टीम शाम करीब 6:10 बजे घुम्मन के आवास पर पहुंची और तलाशी शुरू की। यह स्थान थाना भवानीगढ़ के अंतर्गत आता है।
फिलहाल दोनों स्थानों पर की गई तलाशी से क्या बरामद हुआ या जांच एजेंसी को कौन से दस्तावेज अथवा अन्य सामग्री मिली, इसकी आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
CBI की यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सोमवार के उस आदेश के बाद हुई है, जिसमें अदालत ने कथित ‘कैश फॉर ट्रांसफर-पोस्टिंग’ और सरकारी कामकाज से जुड़े अन्य आरोपों की जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया था। मामला उन आरोपों से जुड़ा है जिनमें सरकारी अधिकारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर, नीतिगत फैसलों, टेंडर तथा अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में कथित तौर पर अनुचित प्रभाव और लेन-देन के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की अभी जांच होनी है और इन्हें अदालत द्वारा साबित तथ्य नहीं माना गया है।
मामला तब अदालत के सामने आया जब याचिकाकर्ता की ओर से यह आरोप लगाया गया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक को कई पत्र भेजकर कथित अनियमितताओं की जानकारी दी थी, लेकिन राज्य स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। हाईकोर्ट ने मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता को देखते हुए CBI को जांच का निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद पंजाब सरकार ने भी इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राज्य सरकार का तर्क है कि हाईकोर्ट के आदेश की वैधानिकता और CBI जांच के अधिकार क्षेत्र पर शीर्ष अदालत में विचार होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की आम आदमी पार्टी सरकार और केंद्र की भाजपा सरकार के बीच राजनीतिक टकराव को भी तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने CBI और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर केंद्र पर राजनीतिक निशाना साधा है और इसे पंजाब की निर्वाचित सरकार को दबाव में लेने की कोशिश के तौर पर पेश किया है। दूसरी ओर, जांच एजेंसियों की कार्रवाई को अदालत के निर्देश के बाद शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
राजबीर सिंह घुम्मन का नाम इस मामले में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि वह मुख्यमंत्री के OSD के तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े हुए हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति का जांच के दायरे में आना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। CBI की तलाशी का उद्देश्य उपलब्ध आरोपों और दस्तावेजों की जांच कर यह पता लगाना है कि क्या किसी संज्ञेय अपराध के प्रमाण मौजूद हैं।
मामले की राजनीतिक अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पंजाब विधानसभा चुनाव अब कुछ ही महीने दूर हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े व्यक्ति के आवास और मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस में CBI की कार्रवाई निश्चित तौर पर चुनावी माहौल में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है। विपक्षी दल इसे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं, जबकि AAP इसे केंद्रीय एजेंसियों के कथित राजनीतिक इस्तेमाल के रूप में पेश कर सकती है।
फिलहाल इस पूरे मामले में तीन मोर्चे समानांतर रूप से आगे बढ़ रहे हैं—CBI की जांच, हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पंजाब सरकार की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती और इसके बीच तेज होती राजनीतिक बयानबाजी।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि CBI की तलाशी से जांच एजेंसी के हाथ क्या सामग्री लगती है और सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के आदेश पर क्या रुख अपनाता है। जांच पूरी होने से पहले किसी भी आरोप को स्थापित तथ्य मानना जल्दबाजी होगी, लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े परिसरों तक पहुंची CBI की कार्रवाई ने पंजाब की राजनीति में इस विवाद को निश्चित रूप से एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।