पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के चंडीगढ़ स्थित कैंप ऑफिस और उनके OSD राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े परिसरों पर CBI की कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री कार्यालय को निशाना बनाना राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है। पार्टी के अन्य नेताओं ने भी CBI कार्रवाई को लेकर केंद्र की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर कहा कि चुनाव से ठीक पहले पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय पर CBI की रेड भाजपा की ‘बौखलाहट’ का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद पंजाब के साथ लगातार अन्याय हुआ है और किसान आंदोलन, पंजाब के पानी तथा पंजाब यूनिवर्सिटी जैसे मुद्दों को लेकर केंद्र और पंजाब के बीच टकराव रहा है।
केजरीवाल ने दावा किया कि भाजपा राजनीतिक रूप से पंजाब में मुकाबला करने की स्थिति में नहीं होने के कारण ED और CBI जैसी केंद्रीय एजेंसियों के जरिए चुनावी लड़ाई लड़ना चाहती है। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता चुनाव में इसका जवाब देगी और दावा किया कि लोग भगवंत मान को दोबारा मुख्यमंत्री बनाएंगे। यह दावा फिलहाल AAP का राजनीतिक आकलन है, चुनाव परिणाम की भविष्यवाणी नहीं।
AAP का यह हमला ऐसे समय हुआ है जब CBI ने मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस के अलावा OSD राजबीर सिंह घुम्मन के संगरूर स्थित पैतृक घर पर भी तलाशी ली। कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद हुई, जिसमें अदालत ने ED की ओर से पंजाब पुलिस को भेजी गई सूचनाओं के आधार पर CBI को आपराधिक मामला दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया था।
मामला कथित तौर पर सरकारी ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी फैसलों तक पहुंच, गोपनीय दस्तावेजों और अन्य सरकारी सुविधाएं दिलाने से जुड़े आरोपों से संबंधित है। हाईकोर्ट के समक्ष पेश सामग्री में राजबीर सिंह घुम्मन और कथित बिचौलिये नितिन गोहल समेत कुछ अन्य लोगों के नाम सामने आए थे। हालांकि, इन आरोपों की अभी जांच होनी है और अदालत ने इन्हें दोष सिद्धि के रूप में घोषित नहीं किया है।
पंजाब AAP अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने भी CBI जांच के आदेश को स्वीकार करते हुए केंद्रीय जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गैरकानूनी गतिविधियों को न तो करेगी और न ही बर्दाश्त करेगी, लेकिन केंद्रीय एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद को लेकर आशंकाएं हैं।
AAP के लिए इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। राज्य सरकार ने 6 अक्टूबर को विशेष अनुमति याचिका दायर की और सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की। सरकार की ओर से यह दलील भी रखी गई कि विधानसभा चुनाव नजदीक होने के दौरान इस तरह की कार्रवाई संघीय ढांचे से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करती है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए लेने पर सहमति जताई है।
इस बीच भाजपा ने AAP के आरोपों को खारिज करते हुए मामले को भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा बताया है। भाजपा नेताओं ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए पंजाब सरकार से आरोपों पर जवाब मांगना शुरू कर दिया है। यानी राजनीतिक विवाद अब केवल CBI कार्रवाई तक सीमित नहीं है; यह सीधे-सीधे चुनावी नैरेटिव का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है।
पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ यह घटनाक्रम AAP और भाजपा के बीच पहले से मौजूद राजनीतिक टकराव को और तीखा कर सकता है। AAP इसे केंद्र की एजेंसियों के कथित इस्तेमाल और पंजाब के राजनीतिक अधिकारों के सवाल से जोड़ रही है, जबकि भाजपा इसे मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों पर लगे आरोपों की जांच के रूप में पेश कर रही है।
फिलहाल कानूनी स्थिति स्पष्ट है—CBI जांच हाईकोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई है और पंजाब सरकार ने उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, लेकिन जांच का निष्कर्ष आने तक किसी भी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रमाणित अपराध के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी। इसके साथ ही CBI की जांच से सामने आने वाले तथ्य यह निर्धारित करेंगे कि यह मामला केवल राजनीतिक टकराव का मुद्दा बनकर रह जाता है या जांच के दौरान आरोपों को लेकर ठोस साक्ष्य सामने आते हैं।