पंजाब DA बकाया मामला: हाईकोर्ट में पेश हुए मुख्य सचिव केएपी सिन्हा, अवमानना केस रोस्टर बेंच को सौंपा
सरकार ने बिना शर्त माफी मांगने की पेशकश की; कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते के भुगतान को लेकर कानूनी लड़ाई जारी

पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (DA/DR) के भुगतान से जुड़े मामले में शुक्रवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा अदालत में पेश हुए। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उनके लिए बिना शर्त माफी मांगने की पेशकश की गई, लेकिन हाईकोर्ट ने मामले को निर्धारित रोस्टर के अनुसार अवमानना मामलों की सुनवाई करने वाली पीठ के समक्ष भेजने का निर्देश दिया।
यह मामला केवल कर्मचारियों के वित्तीय बकाये तक सीमित नहीं रह गया है। अदालत के पहले के आदेशों के अनुपालन और सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की अपील की स्थिति को लेकर दिए गए हलफनामे में तथ्यों की सत्यता भी सुनवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत ने निर्देश दिया कि कथित अवमानना और आदेशों के अनुपालन से जुड़े मामले को रोस्टर के तहत संबंधित पीठ के समक्ष रखा जाए। अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को निर्धारित किए जाने की जानकारी भी रिपोर्ट की गई है।
राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि मुख्य सचिव की मंशा अदालत को गुमराह करने की नहीं थी और यदि अदालत उचित समझे तो वह बिना शर्त माफी मांगने के लिए तैयार हैं। हालांकि, माफी की पेशकश को स्वीकार कर अवमानना की कार्यवाही समाप्त करने का कोई अंतिम निर्णय इस सुनवाई में नहीं हुआ। अब आगे की कार्यवाही संबंधित रोस्टर पीठ के समक्ष होगी।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
महंगाई भत्ते के बकाये को लेकर विवाद में हाईकोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) की अपीलें खारिज करते हुए कर्मचारियों तथा पेंशनरों को केंद्र सरकार के अनुरूप लंबित DA/DR किस्तों का भुगतान करने का निर्देश दिया था। अदालत ने भुगतान के लिए 15 दिन की समय-सीमा तय की थी और अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी मुख्य सचिव को सौंपी थी।
इसके बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। लेकिन अपील में प्रक्रियागत कमियों को दूर किए जाने की स्थिति को लेकर विवाद खड़ा हो गया। हाईकोर्ट के सामने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की स्थिति रिपोर्ट आने के बाद यह सवाल उठा कि क्या राज्य सरकार की ओर से पहले दिए गए हलफनामे में अपील की कमियां दूर होने के संबंध में सही जानकारी दी गई थी।
6 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया मुख्य सचिव के बयान को गलत पाते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा था कि उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। उन्हें 9 अक्टूबर को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था।
कर्मचारियों के बकाये पर कितना बड़ा सवाल?
DA/DR का विवाद पंजाब के मौजूदा और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वित्तीय हितों से जुड़ा है। द इंडियन एक्सप्रेस की सितंबर में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि लगभग ₹14,191 करोड़ की राशि का भुगतान 15 दिनों के भीतर करना वित्तीय और प्रशासनिक दृष्टि से संभव नहीं है।
हालांकि, हाईकोर्ट के 3 अगस्त के आदेश में लंबित किस्तों के भुगतान के साथ समय-सीमा पार होने पर बकाया राशि पर 6 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज का प्रावधान भी था। अदालत ने राज्य सरकार को कर्मचारियों के बकाये का भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।
इसलिए अब इस मामले में दो महत्वपूर्ण पहलू हैं—एक ओर कर्मचारियों और पेंशनरों को उनका लंबित महंगाई भत्ता कब मिलेगा, और दूसरी ओर अदालत के आदेशों के अनुपालन तथा हलफनामे में दिए गए बयानों को लेकर मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना संबंधी कार्यवाही में क्या निर्णय होता है।
आगे क्या होगा? मामले को 12 अक्टूबर को रोस्टर के अनुसार संबंधित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किए जाने की रिपोर्ट है। उस सुनवाई में आगे की कानूनी प्रक्रिया और सरकार के पक्ष पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, बिना शर्त माफी की पेशकश को अंतिम राहत या अवमानना मामले के निपटारे के रूप में देखना सही नहीं होगा।