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नशों के खिलाफ जंग में खेल मैदान बनेंगे पंजाब की ढाल, गांवों में विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं विकसित करने पर मान सरकार का जोर

67.16 लाख रुपये की लागत से तैयार आधुनिक खेल परिसर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किया समर्पित; बोले- युवाओं को नशे से दूर रखकर खेल, अनुशासन और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता

संगरूर, पंजाब में नशे की समस्या से निपटने के लिए भगवंत मान सरकार अब खेलों और ग्रामीण खेल ढांचे को एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शनिवार को कहा कि नशों के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस कार्रवाई और कानून के सख्त इस्तेमाल से नहीं जीती जा सकती, बल्कि इसके लिए समाज की व्यापक भागीदारी और युवाओं को सकारात्मक विकल्प उपलब्ध कराना भी जरूरी है। इसी सोच के तहत गांवों में आधुनिक खेल मैदान तैयार किए जा रहे हैं, ताकि युवा अपनी ऊर्जा खेल, फिटनेस और रचनात्मक गतिविधियों में लगा सकें।

मुख्यमंत्री ने 67.16 लाख रुपये की लागत से निर्मित एक आधुनिक खेल मैदान लोगों को समर्पित करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिनसे वे अपने खेल कौशल को निखारकर उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंच सकें। उनके अनुसार, प्रत्येक गांव में बेहतर शिक्षा के लिए एक अच्छा स्कूल और खेलों के लिए पर्याप्त सुविधाओं वाला मैदान होना चाहिए। सरकार चाहती है कि युवाओं के हाथों में नशे की जगह खेलों का सामान हो और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए गांव से बाहर सुविधाओं की तलाश न करनी पड़े।

नवनिर्मित खेल परिसर में वॉलीबॉल कोर्ट, फुटबॉल मैदान, छह लेन वाला 400 मीटर का रनिंग ट्रैक और क्रिकेट पिच सहित कई सुविधाएं विकसित की गई हैं। परिसर में चेन-लिंक फेंसिंग, चारदीवारी तथा खिलाड़ियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह का बुनियादी ढांचा ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर देगा और उन्हें जिला, राज्य, राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता साबित करने के लिए तैयार करेगा।

भगवंत मान ने कहा कि खेल मैदानों का महत्व केवल शारीरिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। ये गांवों में सामाजिक मेलजोल, सामूहिक भागीदारी और भाईचारे को मजबूत करने के केंद्र भी बन सकते हैं। खेलों के माध्यम से बच्चों और युवाओं में टीम भावना, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और एक-दूसरे के प्रति सम्मान जैसे गुण विकसित होते हैं। उनका कहना था कि सरकार का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य पूरा करना नहीं, बल्कि एक ऐसी पीढ़ी तैयार करना है जो शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से मजबूत और नशों से दूर हो।

मुख्यमंत्री ने ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मुहिम को सामाजिक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए युवाओं को खेलों से जोड़ना जरूरी है। उनके मुताबिक, जब युवाओं को गांवों में ही खेल सुविधाएं, प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे, तो उनकी ऊर्जा को रचनात्मक दिशा देने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान को केवल कार्रवाई तक सीमित रखने के बजाय इसे शिक्षा, खेल और सामुदायिक सहभागिता से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने पंजाब की खेल परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य ने देश को अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए हैं और सरकार इस गौरवशाली पहचान को फिर मजबूत करना चाहती है। उन्होंने जोर दिया कि किसी बच्चे की आर्थिक स्थिति या उसके गांव की भौगोलिक स्थिति उसकी खेल प्रतिभा के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए। हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी को बेहतर मैदान, जरूरी सुविधाएं और अपनी क्षमता साबित करने का समान अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि खेल ढांचे पर खर्च किया गया पैसा वास्तव में युवाओं के स्वास्थ्य, चरित्र और भविष्य में निवेश है। स्वस्थ शरीर और मजबूत मन ही एक बेहतर समाज की बुनियाद तैयार करते हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि नए खेल परिसर गांव के युवाओं के लिए खेल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनेंगे और दूसरे बच्चों को भी खेलों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित करेंगे।

मान सरकार के इस प्रयास के सामने अब बड़ी चुनौती इन सुविधाओं का नियमित उपयोग सुनिश्चित करना, खिलाड़ियों को निरंतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराना और ग्रामीण प्रतिभाओं को प्रतियोगिताओं तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करना होगा। खेल मैदानों का निर्माण नशे के खिलाफ सामाजिक अभियान को आधार दे सकता है, लेकिन इसके स्थायी परिणामों के लिए प्रशिक्षकों, खेल सामग्री, प्रतियोगिताओं और युवाओं की लगातार भागीदारी पर भी ध्यान देना आवश्यक होगा।

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