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‘युद्ध नशे विरुद्ध’ पर बड़ा सवाल: राणा गुरजीत सिंह का हमला, बोले—जागरूकता नहीं, अब ज़मीन पर निर्णायक कार्रवाई चाहिए

पंजाब में नशे के खिलाफ आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा छेड़े गए ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व कैबिनेट मंत्री और विधायक राणा गुरजीत सिंह का तीखा बयान सामने आया है, जिसने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। राणा गुरजीत सिंह ने पंजाब में नशे के बढ़ते इस्तेमाल और तस्करी पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि केवल जागरूकता अभियानों और नारों से यह लड़ाई नहीं जीती जा सकती, बल्कि अब ठोस, सख्त और ज़मीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई की ज़रूरत है।

राज्यपाल द्वारा नशे के मुद्दे पर बुलाए जाने का स्वागत करते हुए राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि यह समस्या किसी एक सरकार या एक विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब के सामाजिक ताने-बाने से जुड़ा हुआ गंभीर संकट बन चुकी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है और यहां सीमा पार से नशे की तस्करी लगातार जारी है। 50 किलोमीटर का सीमावर्ती इलाका केंद्र सरकार के नियंत्रण में आता है, ऐसे में इस समस्या की जिम्मेदारी से केंद्र सरकार भी पल्ला नहीं झाड़ सकती।

उन्होंने 2014 के बाद पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए नशे की सप्लाई को एक बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि यह अब कोई छिपी हुई बात नहीं रही। राणा गुरजीत सिंह ने सवाल उठाया कि अगर ड्रोन के माध्यम से लगातार नशा सीमा पार से पंजाब में पहुंच रहा है, तो सीमा सुरक्षा बल अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कितनी प्रभावी ढंग से कर रहा है। उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की।

कांग्रेस नेता ने आम आदमी पार्टी सरकार के ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने इसे ज़मीनी हकीकत से दूर बताते हुए कहा कि यह अभियान अब एक “फ्लॉप शो” बनकर रह गया है। उनके अनुसार, सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि नशे की सप्लाई आज भी घर-घर तक बिना किसी रोक-टोक के पहुंच रही है। केवल आंकड़ों की बाज़ीगरी और छोटे तस्करों पर कार्रवाई दिखाकर इस गहरी जड़ें जमा चुकी समस्या को खत्म नहीं किया जा सकता।

राणा गुरजीत सिंह ने नशे की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानने से इनकार करते हुए इसके सामाजिक और आर्थिक कारणों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी और किसानी संकट पंजाब में नशे के बढ़ते चलन के सबसे बड़े कारण हैं। राज्य में उद्योगों की भारी कमी है, जिससे युवाओं के पास रोजगार के अवसर नहीं हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि पंजाब के लिए विशेष आर्थिक पैकेज लाया जाए, बड़े स्तर पर निवेश हो और औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया जाए, ताकि युवाओं को रोजगार मिले और वे नशे की गिरफ्त में जाने से बच सकें।

उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ असली लड़ाई तभी जीती जा सकती है, जब बड़े तस्करों, नेटवर्क के संचालकों और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर सीधी चोट की जाए। सिर्फ छोटे तस्करों के घर तोड़ने या प्रतीकात्मक कार्रवाइयों से सरकार अपनी पीठ नहीं थपथपा सकती। राणा गुरजीत सिंह ने राज्यपाल और पंजाब सरकार से आग्रह किया कि वे राजनीतिक बयानबाज़ी से ऊपर उठकर एक समग्र, कठोर और दीर्घकालिक रणनीति तैयार करें।

आम आदमी पार्टी सरकार जहां नशे के खिलाफ अपने अभियान को ऐतिहासिक और निर्णायक बता रही है, वहीं कांग्रेस नेता का यह बयान साफ संकेत देता है कि पंजाब में नशे का मुद्दा अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक टकराव का भी केंद्र बन गया है। ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ के बीच आया यह बयान आने वाले दिनों में राज्य की सियासत को और गर्म करने वाला माना जा रहा है, क्योंकि सवाल अब अभियानों के शोर से आगे बढ़कर उनकी वास्तविक प्रभावशीलता पर टिक गए हैं।

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