हरियाणा की राजनीति आज उस समय गरमा गई जब बजट सत्र के तीसरे दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायकों ने सत्ता पक्ष पर सीधा हमला बोलते हुए विधानसभा तक पैदल मार्च निकाला। सुबह करीब दस बजे एमएलए हॉस्टल से शुरू हुआ यह मार्च नेता प्रतिपक्ष Bhupinder Singh Hooda के नेतृत्व में निकाला गया, जिसमें सभी कांग्रेस विधायक एकजुट दिखाई दिए। यह मार्च सिर्फ प्रतीकात्मक विरोध नहीं बल्कि सरकार की नीतियों के खिलाफ संगठित राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस ने साफ संकेत दिया है कि वह पेंशन, बेरोजगारी, कथित घोटालों और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार को विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।
तीसरे दिन की कार्यवाही सुबह 11 बजे प्रश्नकाल से शुरू होने वाली है, जिसमें कांग्रेस और सत्तारूढ़ Bharatiya Janata Party के लगभग 20 विधायकों द्वारा विभिन्न विभागों से जुड़े सवाल लगाए गए हैं। सदन में आज 13 श्रेणियों में दी जा रही सामाजिक पेंशन योजनाओं का मुद्दा प्रमुखता से उठने की संभावना है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार पेंशन योजनाओं के दायरे और वितरण को लेकर स्पष्टता नहीं दे रही है, जबकि बीजेपी सरकार का दावा है कि उसने बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांगों और अन्य पात्र वर्गों को समय पर आर्थिक सहायता सुनिश्चित की है। पेंशन की राशि, पात्रता मानदंड और लंबित आवेदनों को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के संकेत मिल रहे हैं।
इस बीच, पूर्व अंतरराष्ट्रीय पहलवान और कांग्रेस विधायक Vinesh Phogat ने भी खिलाड़ियों से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाया है, जिससे खेल नीति और खिलाड़ियों के सम्मान का विषय भी चर्चा में आने वाला है। माना जा रहा है कि राज्य में खिलाड़ियों के लिए सुविधाओं, पुरस्कार राशि और सुरक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर सरकार को जवाब देना पड़ सकता है। हरियाणा लंबे समय से खेल प्रतिभाओं के लिए जाना जाता रहा है, ऐसे में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील माना जा रहा है।
सोमवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर हुई चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा कि अभिभाषण में स्वास्थ्य, प्रदूषण नियंत्रण, पशुपालन और परिवहन जैसे अहम क्षेत्रों का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में कथित तौर पर हजारों करोड़ रुपये के धान घोटाले और श्रम विभाग में वित्तीय अनियमितताओं का जिक्र तक नहीं किया गया। विपक्ष ने यह भी मुद्दा उठाया कि आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या, कर्मचारियों की आत्महत्या की घटनाएं और सूरजकुंड मेले में झूला टूटने से एक पुलिस अधिकारी की मौत जैसे संवेदनशील मामलों पर सरकार की ओर से ठोस जवाब नहीं दिया गया। कांग्रेस का कहना है कि इन घटनाओं पर जवाबदेही तय होनी चाहिए, जबकि सरकार के कुछ मंत्रियों द्वारा इन्हें “भगवान की मर्जी” बताने जैसी टिप्पणियों पर विपक्ष ने कड़ा ऐतराज जताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र का यह चरण हरियाणा की मौजूदा राजनीतिक दिशा तय करने में अहम साबित हो सकता है। एक ओर बीजेपी सरकार अपने विकास कार्यों, निवेश और सामाजिक योजनाओं को उपलब्धि के तौर पर प्रस्तुत करने की कोशिश में है, वहीं कांग्रेस बेरोजगारी, पेंशन, कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक संवेदनशीलता के मुद्दों को जनता के बीच प्रमुखता से उठाकर सरकार को घेरना चाहती है। विधानसभा के भीतर होने वाली बहस आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक रणनीतियों और चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है।
हरियाणा की राजनीति में यह टकराव केवल सदन की कार्यवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाले चुनावी परिदृश्य की पृष्ठभूमि भी तैयार कर रहा है, जहां सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही बड़े मुद्दे बनकर उभर सकते हैं। आज का दिन इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि प्रश्नकाल और पेंशन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को सीधे जवाब देने होंगे और विपक्ष अपनी आक्रामक रणनीति को और तेज कर सकता है।
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