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पाकिस्तान–अफगान सीमा पर तनाव चरम पर: ‘ऑपरेशन ग़ज़ब लिल हक़’ के तहत पाकिस्तान की बड़ी सैन्य कार्रवाई, काबुल से कंधार तक हमले


पाकिस्तान ने अफगान सीमा से जुड़े कथित हमलों के जवाब में ‘ऑपरेशन ग़ज़ब लिल हक़’ के तहत बड़ी सैन्य कार्रवाई शुरू की है। इस अभियान में पाकिस्तानी सेना द्वारा अफगान तालिबान के कई ठिकानों, सैन्य पोस्टों और कमांड सेंटरों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई काबुल, पक्तिया और कंधार जैसे संवेदनशील इलाकों तक फैली है, जिसमें भारी नुकसान की खबरें सामने आई हैं।

पाकिस्तानी नेतृत्व ने इस सैन्य अभियान को देश की संप्रभुता की रक्षा से जोड़ते हुए सख्त रुख अपनाया है। राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा और किसी भी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई का निर्णायक जवाब दिया जाएगा।

रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अफगान तालिबान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नाटो सेनाओं की वापसी के बाद तालिबान एक नए भू-राजनीतिक खेल का हिस्सा बन गया है और वह अब क्षेत्रीय शक्तियों के लिए प्रॉक्सी की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि तालिबान की गतिविधियां सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा दे रही हैं और इससे पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा प्रभावित हो रही है।

पाकिस्तान का कहना है कि उसकी “रणनीतिक सहनशीलता” अब खत्म हो चुकी है और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। इस घटनाक्रम से क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि यह संघर्ष केवल पाकिस्तान और अफगानिस्तान तक सीमित न रहकर व्यापक दक्षिण एशियाई भू-राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।

भारतीय दृष्टिकोण से यह घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव का असर न केवल सीमा सुरक्षा पर पड़ेगा, बल्कि आतंकवाद, शरणार्थी संकट और क्षेत्रीय कूटनीति पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच बढ़ता टकराव पूरे क्षेत्र में अस्थिरता को और तेज कर सकता है, जिसका असर अंततः भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया पर पड़ेगा।

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