मध्य-पूर्व में बढ़ते युद्ध जैसे हालातों का असर अब भारत के घरेलू जीवन पर भी दिखाई देने लगा है। Strait of Hormuz के आसपास बढ़ते तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बन गया है। विशेष रूप से Iran और United States के बीच बढ़ते टकराव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की आपूर्ति को प्रभावित किया है। इसका सीधा प्रभाव भारत में एलपीजी की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ रहा है।
ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र से होकर गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर सुरक्षा जोखिम बढ़ने से गैस और कच्चे तेल के जहाजों की आवाजाही धीमी हो गई है। यही कारण है कि भारत में गैस आपूर्ति की श्रृंखला पर दबाव बन रहा है और सरकार को आपूर्ति संतुलित बनाए रखने के लिए कई एहतियाती कदम उठाने पड़ रहे हैं।
गैस बुकिंग नियमों में बड़ा बदलाव
स्थिति को नियंत्रित करने और जमाखोरी को रोकने के लिए सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है। अब उपभोक्ता एक सिलेंडर प्राप्त करने के कम से कम 25 दिन बाद ही अगला सिलेंडर बुक कर पाएंगे। पहले यह समय सीमा 21 दिन थी।
सरकार का मानना है कि युद्ध जैसी अनिश्चित परिस्थितियों में कई उपभोक्ता घबराकर अतिरिक्त गैस सिलेंडर बुक करने लगते हैं, जिससे सप्लाई सिस्टम पर अचानक दबाव बढ़ जाता है। इस स्थिति को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है ताकि देशभर में गैस की उपलब्धता संतुलित बनी रहे और हर घर तक नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
इसके साथ ही गैस वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए डिलीवरी प्रक्रिया में भी बदलाव किए गए हैं। अब गैस सिलेंडर की डिलीवरी के समय ओटीपी और बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कालाबाजारी और फर्जी बुकिंग पर रोक लगाना है।
गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है। हाल ही में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
14.2 किलोग्राम के घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में लगभग 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। वहीं 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में करीब 115 रुपये तक की वृद्धि देखी गई है। ऊर्जा बाजार के विश्लेषकों का कहना है कि यह वृद्धि पिछले एक वर्ष के दौरान सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक मानी जा रही है।
भारत की गैस आपूर्ति पर खाड़ी क्षेत्र का प्रभाव
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। एलपीजी और प्राकृतिक गैस का एक महत्वपूर्ण भाग खाड़ी क्षेत्र के देशों से आता है। विशेष रूप से Qatar और Saudi Arabia जैसे देश भारत के प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता हैं।
इन देशों से आने वाले अधिकांश ऊर्जा जहाज Strait of Hormuz से होकर गुजरते हैं, जो विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वर्तमान संघर्ष के कारण इस मार्ग पर सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है, जिससे जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है और कई मामलों में देरी भी देखी जा रही है।
सरकार की स्थिति और तुलना
हालांकि सरकार का कहना है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत में ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, देश में एलपीजी की उपलब्धता पूरी तरह समाप्त होने जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव को देखते हुए सावधानी बरतना आवश्यक है।
सरकार यह भी दावा कर रही है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद भारत में गैस की कीमतें अभी भी कई पड़ोसी देशों की तुलना में कम हैं। उदाहरण के तौर पर Pakistan और Sri Lanka में एलपीजी की कीमतें अपेक्षाकृत अधिक बताई जा रही हैं।
आगे क्या हो सकता है
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य-पूर्व में संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में और अधिक अस्थिरता देखी जा सकती है। ऐसी स्थिति में तेल और गैस की कीमतों में और वृद्धि होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति हो सकती है क्योंकि ऊर्जा कीमतों में वृद्धि का असर परिवहन, उद्योग और घरेलू खर्चों पर भी पड़ता है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के आम नागरिक तक पहुंचने लगा है। गैस बुकिंग नियमों में सख्ती, कीमतों में बढ़ोतरी और आपूर्ति को संतुलित रखने की कोशिशें इसी बदलती वैश्विक स्थिति की ओर संकेत कर रही हैं। आने वाले समय में यह संकट किस दिशा में जाता है, इस पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू खर्चों की स्थिति काफी हद तक निर्भर करेगी।