पंजाब विधानसभा के जारी सत्र के दौरान सियासी माहौल उस समय और गरमा गया जब कांग्रेस विधायक Sukhpal Singh Khaira के खिलाफ महिलाओं के प्रति कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर निंदा प्रस्ताव लाया गया। आम आदमी पार्टी के विधायकों द्वारा उठाए गए इस मुद्दे के बाद सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित भी करनी पड़ी। इसी घटनाक्रम के बीच खैहरा ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर सरकार और खासकर मुख्यमंत्री Bhagwant Mann पर तीखा हमला बोला और पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
विधानसभा में आम आदमी पार्टी के विधायकों ने आरोप लगाया कि खैहरा ने पंजाब की महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है, जिसके चलते उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया गया। इस मुद्दे पर सदन में तीखी बहस हुई और माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। सरकार की ओर से कहा गया कि महिलाओं के सम्मान से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की अपमानजनक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
इस घटनाक्रम के बाद सुखपाल सिंह खैहरा ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर कहा कि उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई और यह कहा गया कि उन्होंने महिलाओं का अपमान किया है, जबकि वह हर आरोप का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
खैहरा ने कहा कि अगर उन्हें विधानसभा में अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए तो वह पूरे मामले को स्पष्ट रूप से सदन के सामने रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी भी तरह की कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं और जो भी आरोप लगाए गए हैं उनका जवाब देने के लिए तैयार हैं।
अपने संबोधन के दौरान खैहरा ने राज्य के वित्त मंत्री Harpal Singh Cheema और विधानसभा के स्पीकर Kultar Singh Sandhwan का भी नाम लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेता सत्ता के दबाव में काम कर रहे हैं और निष्पक्ष तरीके से स्थिति को देखने के बजाय सरकार के पक्ष में कदम उठा रहे हैं।
खैहरा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर भी निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान की बात करने वाली सरकार को पहले अपने नेतृत्व की टिप्पणियों पर भी नजर डालनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा एक कार्यक्रम में अपने कॉलेज के दिनों की एक कहानी सुनाई गई थी, जिसमें एक लड़की के बारे में इस्तेमाल किए गए शब्द महिलाओं के लिए अपमानजनक थे।
कांग्रेस विधायक ने कहा कि यदि सरकार को वास्तव में महिलाओं के सम्मान की चिंता है तो उसे इस तरह की टिप्पणियों पर भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने आम आदमी पार्टी की महिला विधायकों को भी संबोधित करते हुए कहा कि अगर उनमें हिम्मत है तो वे मुख्यमंत्री से यह सवाल पूछें कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस जैसे महत्वपूर्ण दिन पर ऐसी टिप्पणी क्यों की गई।
खैहरा ने अपने खिलाफ पहले से दर्ज मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार उनके खिलाफ पहले भी कई केस दर्ज कर चुकी है और उन्हें जेल भी भेजा जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी आवाज उठाना बंद नहीं किया। उनका कहना था कि अगर सरकार चाहे तो उन्हें विधानसभा से निलंबित कर सकती है या उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर सकती है, लेकिन वह सच बोलने से पीछे नहीं हटेंगे।
उन्होंने कहा कि वह विधानसभा में जाकर अपनी पूरी बात रखेंगे और सरकार के हर आरोप का जवाब देंगे। खैहरा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी भी परिणाम के लिए तैयार हैं और पंजाब के मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
इस पूरे विवाद के बाद पंजाब की राजनीति में एक बार फिर टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। विधानसभा सत्र के दौरान शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, क्योंकि एक तरफ सरकार महिलाओं के सम्मान के मुद्दे को गंभीरता से उठा रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे अपनी आवाज दबाने की कोशिश बता रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा के इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिसका असर आने वाले दिनों में राजनीतिक माहौल पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सदन के भीतर और बाहर यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।
