हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सामाजिक माध्यमों पर आपत्तिजनक सामग्री साझा करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक और गाली-गलौज से भरा एक वीडियो प्रसारित किए जाने को लेकर पुलिस में शिकायत दी गई है, जिससे डिजिटल मंचों के दुरुपयोग पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थानीय निवासी और पेशे से अधिवक्ता विक्रांत चौहान ने इस संबंध में पुलिस को औपचारिक शिकायत सौंपी है। उन्होंने यह शिकायत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक धीमान को दी, जिसमें एक सामाजिक माध्यम खाते के माध्यम से आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित किए जाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में कहा कि संबंधित खाते पर ऐसे वीडियो डाले गए हैं, जिनमें देश के सर्वोच्च निर्वाचित पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा और सामग्री का उपयोग किया गया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह सामग्री न केवल भ्रामक और अनुचित है, बल्कि इससे समाज में गलत संदेश जा रहा है और युवा पीढ़ी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
विक्रांत चौहान ने पुलिस को बताया कि संबंधित खाते के अनुयायियों की संख्या हजारों में है, जिससे इस तरह की सामग्री का प्रभाव और अधिक व्यापक हो जाता है। उन्होंने आशंका जताई कि इस प्रकार के वीडियो देखकर स्कूली छात्र और युवा भी इसी तरह की सामग्री बनाने के लिए प्रेरित हो सकते हैं, जो सामाजिक मर्यादाओं और जिम्मेदारी के विरुद्ध है।
शिकायत के साथ उन्होंने संबंधित वीडियो के प्रमाण भी पुलिस को सौंपे हैं, ताकि जांच में सहायता मिल सके। पुलिस अब मामले की प्रारंभिक जांच कर रही है और यह परखा जा रहा है कि क्या यह सामग्री कानून के तहत दंडनीय श्रेणी में आती है।
यह घटना एक बार फिर इस बात को रेखांकित करती है कि सामाजिक माध्यमों पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मंचों पर बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त निगरानी और कानूनी कार्रवाई जरूरी है, ताकि किसी भी व्यक्ति या पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कृत्यों पर अंकुश लगाया जा सके।
