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पहाड़ों में बदला मौसम का मिजाज: बारिश, ओलावृष्टि से ठंडक बढ़ी, फसलों को नुकसान

हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम ने अचानक करवट लेते हुए जनजीवन और कृषि गतिविधियों पर गहरा प्रभाव डाला है। राजधानी क्षेत्र में सुबह से बादलों की घनी परत छाई रही, जिससे वातावरण सुहावना बना रहा और बड़ी संख्या में सैलानी इस मौसम का आनंद लेने पहुंचे। हालांकि, इस बदलते मौसम ने जहां पर्यटकों को राहत दी, वहीं किसानों के लिए चिंता बढ़ा दी है।

पिछले तीन दिनों से प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम अस्थिर बना हुआ है। दोपहर के बाद कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि देखी गई। ऊंचाई वाले इलाकों में गिरे ओलों ने विशेष रूप से मटर और सेब की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। बागवानी से जुड़े किसानों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण होता है, ऐसे में ओलावृष्टि ने उनकी मेहनत पर असर डाला है और आगामी उत्पादन को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।

प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बीते चौबीस घंटों के दौरान हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है। इससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड का एहसास फिर से लौट आया है। कई स्थानों पर अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे दर्ज किया गया, जिससे मौसम में ठंडक बढ़ गई है। वहीं मैदानी इलाकों में तापमान अपेक्षाकृत अधिक बना हुआ है, जहां गर्मी का असर जारी है।

मौसम विज्ञान से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में एक मार्च से अब तक सामान्य से लगभग ग्यारह प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। यह कमी लंबे समय में जल संसाधनों और कृषि उत्पादन पर प्रभाव डाल सकती है। हालांकि, वर्तमान में हो रही बारिश इस कमी को आंशिक रूप से संतुलित करने का प्रयास कर रही है, लेकिन इसका वितरण असमान है, जिससे कुछ क्षेत्रों में राहत और कुछ में नुकसान दोनों की स्थिति बनी हुई है।

आगामी दो दिनों में मौसम गतिविधियों में कुछ कमी आने की संभावना जताई गई है, लेकिन छिटपुट बारिश और गरज के साथ बौछारें जारी रह सकती हैं। इसके बाद तीन मई से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम के फिर सक्रिय होने के संकेत हैं। इस दौरान कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा के साथ कुछ स्थानों पर तेज बारिश भी हो सकती है। साथ ही गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका भी व्यक्त की गई है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

पर्यटन के दृष्टिकोण से यह मौसम अनुकूल माना जा रहा है, क्योंकि ठंडक और बादलों की मौजूदगी सैलानियों को आकर्षित कर रही है। लेकिन दूसरी ओर, बार-बार बदलते मौसम के कारण सड़क मार्गों और यातायात पर भी असर पड़ सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में फिसलन और दृश्यता कम होने से दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए प्रशासन और यात्रियों दोनों को सतर्क रहने की जरूरत है।

कृषि और बागवानी क्षेत्र के लिए यह समय बेहद संवेदनशील है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मौसम इसी तरह अस्थिर बना रहा, तो फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। खासकर सेब जैसी नगदी फसल पर इसका असर किसानों की आय को प्रभावित कर सकता है।

कुल मिलाकर, प्रदेश इस समय एक संक्रमणकालीन मौसम दौर से गुजर रहा है, जहां ठंडक और गर्मी के बीच संतुलन लगातार बदल रहा है। ऐसे में लोगों को मौसम के बदलते रुख के अनुसार अपनी दिनचर्या और गतिविधियों में सावधानी बरतने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी संभावित नुकसान से बचा जा सके।

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