प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित हरियाणा दौरे से पहले सुरक्षा एजेंसियां उस समय उच्च सतर्कता पर आ गईं, जब एक कथित खालिस्तान समर्थक संगठन के नाम से धमकी भरा ई-मेल प्राप्त होने की सूचना सामने आई। ई-मेल में प्रधानमंत्री की जींद में प्रस्तावित रैली के साथ-साथ पंजाब और हरियाणा के कुछ प्रमुख सार्वजनिक स्थलों को निशाना बनाने की धमकी दी गई है। इसके बाद केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है।
अधिकारियों के अनुसार, धमकी भरे ई-मेल में दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री के पंजाब और हरियाणा दौरे के दौरान 17 जुलाई को चंडीगढ़ और जालंधर स्थित कुछ संवेदनशील स्थानों, जिनमें विद्यालय, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठान शामिल हैं, को निशाना बनाया जा सकता है। ई-मेल में केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के संबंध में भी धमकी भरे उल्लेख किए गए हैं।
प्रारंभिक जांच में यह ई-मेल कथित तौर पर स्वयं को ‘खालिस्तान नेशनल आर्मी’ बताने वाले एक संगठन के नाम से भेजा गया बताया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस संगठन के नाम से अतीत में भी कई धमकी भरे संदेश भेजे जा चुके हैं। इनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नागपुर मुख्यालय सहित अन्य प्रतिष्ठानों को लेकर भी इसी प्रकार की चेतावनियां दी गई थीं। हालांकि, हर मामले में एजेंसियां तकनीकी और खुफिया स्तर पर अलग-अलग जांच करती हैं और किसी भी दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जाती है।
सूत्रों के अनुसार, ई-मेल की सामग्री में खालिस्तान से जुड़े मुद्दों, किसान आंदोलन तथा दिवंगत मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ के प्रति समर्थन भी व्यक्त किया गया है।
हाल के दिनों में जसवंत सिंह खालड़ा पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ भी चर्चा का विषय रही है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने खालड़ा की भूमिका निभाई है। यह फिल्म भारत में डिजिटल मंच पर रिलीज होने के कुछ ही समय बाद हटा ली गई थी। आधिकारिक स्तर पर सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बाद फिल्म को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ गई थी। खालड़ा ने 1980 और 1990 के दशक के दौरान पंजाब में कथित तौर पर अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों को उजागर करने का कार्य किया था, जिसके कारण उनका नाम मानवाधिकार विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।
धमकी भरे ई-मेल के बाद हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। प्रधानमंत्री की प्रस्तावित रैली स्थल के अलावा रेलवे स्टेशनों, सरकारी भवनों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की जा रही है। बम निरोधक दस्तों, डॉग स्क्वायड और खुफिया इकाइयों को भी सक्रिय कर दिया गया है।
सुरक्षा एजेंसियां ई-मेल की तकनीकी जांच कर रही हैं ताकि उसके स्रोत, प्रेषक और वास्तविकता का पता लगाया जा सके। साइबर विशेषज्ञों की सहायता से ई-मेल की डिजिटल ट्रेल का विश्लेषण किया जा रहा है और विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान भी तेज कर दिया गया है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी धमकी को हल्के में नहीं लिया जाता और सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या वस्तु की सूचना तत्काल पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों को दें तथा अफवाहों से बचें।
प्रधानमंत्री के दौरे से पहले सामने आई इस धमकी ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता और बढ़ा दी है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह तैयार हैं और किसी भी संभावित चुनौती से निपटने के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं पर गहनता से काम किया जा रहा है।
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