अमृतसर पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर का तबादला: आतंकी मॉड्यूल मामले और बयान विवाद के बीच पंजाब सरकार का बड़ा प्रशासनिक फैसला

पंजाब सरकार ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल करते हुए अमृतसर के पुलिस कमिश्नर आईपीएस गुरप्रीत सिंह भुल्लर का तबादला कर दिया। सरकार ने उनकी जगह वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हरमनबीर सिंह को अमृतसर पुलिस कमिश्नरेट का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। हालांकि, जारी आदेश में गुरप्रीत सिंह भुल्लर की नई तैनाती का कोई उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे इस फैसले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

यह तबादला ऐसे समय हुआ है, जब कुछ दिन पहले ही अमृतसर पुलिस ने पाकिस्तान समर्थित बताए जा रहे एक कथित आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने का दावा किया था। इस कार्रवाई में पुलिस ने नौ लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें चार नाबालिग भी शामिल थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से हथियार, जिंदा कारतूस और पेट्रोल बम बरामद करने का भी दावा किया था। जांच में यह भी कहा गया था कि आरोपी विदेश में बैठे कथित हैंडलरों के निर्देश पर काम कर रहे थे और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रेकी कर रहे थे।

इसी मामले पर मीडिया को जानकारी देते हुए पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने कहा था कि जांच के दौरान कुछ आरोपी जंतर-मंतर भी गए थे और वहां प्रदर्शनकारियों को पेट्रोल बम से निशाना बनाने की कथित योजना से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। उनके इस बयान के कुछ हिस्से सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

विवाद बढ़ने पर पंजाब सरकार ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि पुलिस कमिश्नर के बयान को संदर्भ से हटाकर और चुनिंदा हिस्सों को प्रसारित कर गलत धारणा बनाई गई। सरकार ने स्पष्ट किया कि भुल्लर ने कहीं भी यह नहीं कहा था कि गिरफ्तार आरोपी जंतर-मंतर प्रदर्शन का हिस्सा थे या प्रदर्शनकारियों का कथित आतंकी मॉड्यूल से कोई संबंध था। सरकार का कहना था कि अधूरी वीडियो क्लिप के कारण उनके बयान का अर्थ बदलकर प्रस्तुत किया गया।

हालांकि, पंजाब सरकार ने अब तक इस तबादले को किसी विवाद से जोड़ने से इनकार किया है। सरकार की ओर से जारी आदेश में स्थानांतरण का कोई कारण नहीं बताया गया है और इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा माना गया है।

फिलहाल हरमनबीर सिंह अमृतसर पुलिस कमिश्नरेट की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालेंगे। सीमावर्ती और संवेदनशील जिला होने के कारण अमृतसर की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर पूरे राज्य की नजर रहती है। ऐसे में इस बदलाव को प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भले ही सरकार ने इस स्थानांतरण को नियमित प्रशासनिक निर्णय बताया हो, लेकिन इसके समय और हालिया घटनाक्रम को देखते हुए यह मामला पंजाब की राजनीति और प्रशासन दोनों में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।