छह साल से फरार बर्खास्त AIG राजजीत सिंह गिरफ्तार, पटियाला पुलिस के सामने किया आत्मसमर्पण

चंडीगढ़/पटियाला। : पंजाब पुलिस के बर्खास्त असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल (AIG) राजजीत सिंह हुंदल को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। करीब छह साल से फरार चल रहे राजजीत सिंह ने गुरुवार को पटियाला पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

राजजीत सिंह लंबे समय से नशा तस्करी, कथित पुलिस-ड्रग्स नेटवर्क, जबरन वसूली और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों के निशाने पर थे। उनकी गिरफ्तारी पंजाब में नशे के खिलाफ चल रही जांच से जुड़े पुराने और संवेदनशील मामलों में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखी जा रही है। हालांकि, उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक राजजीत सिंह वर्ष 2019 से फरार बताए जा रहे थे। बाद के वर्षों में उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हुए और जांच एजेंसियों ने उनकी तलाश में पंजाब के अलावा अन्य स्थानों पर भी कार्रवाई की। उनकी गिरफ्तारी के लिए अदालत से वारंट जारी होने और बाद में उन्हें भगोड़ा घोषित किए जाने की कार्रवाई भी हुई थी।

राजजीत सिंह का नाम विशेष रूप से बर्खास्त पुलिस इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह से जुड़े ड्रग्स मामले की जांच के दौरान सामने आया था। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष हुई कार्यवाही में भी राजजीत सिंह की कथित भूमिका और पुलिस तथा ड्रग तस्करी के बीच संभावित गठजोड़ की जांच का मुद्दा उठा था। इसी पृष्ठभूमि में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था।

राजजीत सिंह के खिलाफ बाद में आपराधिक साजिश, रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और जबरन वसूली से जुड़े आरोपों के तहत भी मामले दर्ज किए गए। कुछ मामलों में भारतीय दंड संहिता की धाराओं के साथ-साथ NDPS Act की धाराएं भी लगाई गई थीं। जांच एजेंसियों का आरोप रहा है कि उन्होंने कथित तौर पर नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में आरोपी पुलिस अधिकारी इंद्रजीत सिंह को संरक्षण देने और जांच से जुड़े रिकॉर्ड में हेरफेर करने में भूमिका निभाई। ये सभी आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

राजजीत सिंह की फरारी के दौरान जांच एजेंसियों ने उनकी संपत्तियों और बैंक खातों से जुड़े मामलों की भी जांच की। 2024 में STF की कार्रवाई के दौरान उनकी और उनकी पत्नी से जुड़ी कुछ संपत्तियों को फ्रीज किए जाने तथा बैंक खातों पर कार्रवाई की रिपोर्ट सामने आई थी। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि इन संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की जांच कथित ड्रग्स से जुड़े धन के एंगल से की जा रही है।

अब गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल उन मामलों की आगे की जांच का है, जिनमें राजजीत सिंह लंबे समय से वांछित थे। पुलिस उनसे ड्रग्स से जुड़े मामलों, कथित जबरन वसूली, भ्रष्टाचार, संपत्ति और अन्य वित्तीय लेन-देन के संबंध में पूछताछ कर सकती है। रिपोर्टों के अनुसार उन्हें संबंधित मामलों में पूछताछ के लिए अदालत के समक्ष पेश कर रिमांड मांगे जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

इस गिरफ्तारी का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि राजजीत सिंह एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के पद पर रह चुके हैं। वर्ष 2019 में उन्हें सेवा से बर्खास्त किया गया था। उनके खिलाफ हुई जांच ने पंजाब में पुलिस तंत्र और नशा तस्करी के बीच कथित संबंधों को लेकर पहले से चल रही बहस को भी प्रमुखता दी थी।

फिलहाल राजजीत सिंह की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी। पुलिस पूछताछ, दस्तावेजी और वित्तीय साक्ष्यों की जांच तथा अदालत में होने वाली अगली कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि उनके खिलाफ दर्ज मामलों में अभियोजन के पास किस स्तर के साक्ष्य हैं।

कानूनी रूप से गिरफ्तारी या किसी मामले में आरोपी बनाया जाना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। राजजीत सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय सक्षम अदालत द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर किया जाएगा।