2001 से लंबित पेंशन मामले में पंजाब सरकार पर फिर ₹2 लाख की लागत, मुख्य सचिव को अवमानना नोटिस

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने वर्ष 2001 से लंबित पेंशन मामले में अदालत के निर्देशों का पालन नहीं करने पर पंजाब सरकार पर एक बार फिर ₹2 लाख की लागत लगाई है। न्यायमूर्ति संदीप मौदगिल ने मामले की सुनवाई करते हुए पंजाब के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा को भी नोटिस जारी किया है।

अदालत ने मुख्य सचिव से जवाब मांगा है कि लगातार न्यायिक आदेशों का पालन नहीं किए जाने के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। इसी मामले में अदालत इससे पहले भी पंजाब सरकार पर ₹1.5 लाख की लागत लगा चुकी है।

मामला विष्णु दत्त एवं अन्य की ओर से पंजाब सरकार के खिलाफ दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने पेंशन और अन्य पेंशन संबंधी लाभों की दोबारा गणना कर उन्हें बढ़ाने की मांग की है। यह रिट याचिका वर्ष 2001 में दायर की गई थी और मामला करीब 25 वर्षों से अदालत में लंबित है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार की ओर से अब तक लिखित जवाब दाखिल नहीं किया गया है, जबकि इस संबंध में अदालत पहले ही निर्देश जारी कर चुकी है। अदालत ने लगातार हो रही देरी और आदेशों के अनुपालन में विफलता पर कड़ा रुख अपनाया।

हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अदालत के निर्देशों का बार-बार पालन नहीं किया जाना प्रथम दृष्टया आदेशों की जानबूझकर अवहेलना और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयास को दर्शाता है।

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता पिछली तीन सुनवाइयों में पेश नहीं हुआ था। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता की अनुपस्थिति राज्य सरकार को अदालत के आदेशों का पालन करने से मुक्त नहीं करती।

मामले की लंबी अवधि को देखते हुए अदालत ने यह भी चिंता जताई कि इस तरह की देरी का सीधा असर पेंशन से जुड़े लोगों पर पड़ता है। मामले में कुछ संबंधित कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि कुछ की मृत्यु भी हो चुकी है।

अब मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा को अदालत के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि राज्य सरकार की ओर से न्यायालय के पूर्व निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।