

भगवान वाल्मीकि तीर्थ स्थल के सौंदर्यीकरण पर पंजाब सरकार खर्च कर रही है 17.72 करोड़ रुपये: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
अमृतसर ( कुमार सोनी )
महर्षि भगवान वाल्मीकि जी के पावन प्रकाश पर्व पर उनके पवित्र तीर्थ स्थल पर नतमस्तक होते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने उनकी दिव्य विरासत को संरक्षित करने तथा समानता, मानवता और सदाचार की उनकी शाश्वत शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार करने के लिए पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान वाल्मीकि तीर्थ स्थल को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने और इसके सौंदर्यीकरण पर सरकार द्वारा 17.72 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके माध्यम से श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ धार्मिक स्थलों की पवित्रता को भी बनाए रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन धार्मिक और विद्वान व्यक्तियों के हाथों में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब की पवित्र धरती पर हर बीज पनप सकता है, लेकिन नफरत का बीज यहां कभी फल-फूल नहीं सकता।
इस पावन समारोह की कुछ झलकियां साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “आज मुझे अमृतसर में महर्षि भगवान वाल्मीकि जी के पावन प्रकाश पर्व पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में नतमस्तक होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। तीर्थ स्थल के विकास के लिए आज 17.5 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। हमारा दृढ़ विश्वास है कि धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन राजनेताओं के बजाय धार्मिक और विद्वान व्यक्तियों द्वारा किया जाना चाहिए। पंजाब की धरती पर हर बीज पनप सकता है, लेकिन नफरत का बीज इस पवित्र धरती पर कभी नहीं उग सकता।”
महर्षि भगवान वाल्मीकि जी के प्रकाश उत्सव के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “महर्षि भगवान वाल्मीकि जी की आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाएगा। इस पावन अवसर पर तीर्थ स्थल पर नतमस्तक होने के बाद मुख्यमंत्री ने देश-विदेश में रहने वाली संगत को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार महर्षि भगवान वाल्मीकि जी द्वारा दिखाए गए सदाचार, समानता और मानवता के मार्ग पर चलते हुए ऐसे समतामूलक समाज के निर्माण के लिए प्रयासरत है, जहां प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, गरिमा और समान अवसर प्राप्त हों। महर्षि भगवान वाल्मीकि जी को संस्कृत साहित्य का पितामह और आदिकवि बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “महर्षि भगवान वाल्मीकि जी द्वारा रचित अमर महाकाव्य रामायण हजारों वर्षों से मानवता को सदाचार का मार्ग दिखा रहा है। यह कालजयी रचना बुराई पर अच्छाई की विजय का शाश्वत संदेश देती है और आज भी सत्य, नैतिकता, करुणा तथा सदाचरण के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है।”
उन्होंने कहा कि महर्षि भगवान वाल्मीकि जी की शिक्षाएं किसी विशेष कालखंड या समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “महर्षि भगवान वाल्मीकि जी की अमर रचना रामायण आज भी समाज को सत्य, न्याय, समानता और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। आज जब भौतिकवादी सोच मानवीय संबंधों को तेजी से प्रभावित कर रही है, ऐसे समय में इस पवित्र महाकाव्य में निहित आदर्श पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। समकालीन समाज में महर्षि भगवान वाल्मीकि जी की शिक्षाओं के महत्व पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि महर्षि भगवान वाल्मीकि जी ने आदर्श व्यक्ति, आदर्श शासक और आदर्श समाज के स्थायी सिद्धांत प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री ने कहा, “ये सिद्धांत समाज को आपसी भेदभाव से ऊपर उठकर पारस्परिक सम्मान, सामाजिक न्याय और भाईचारे पर आधारित भविष्य के निर्माण के लिए प्रेरित कर सकते हैं। पंजाब महान गुरुओं, संतों, ऋषियों और पैगंबरों की विरासत से समृद्ध है। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि भगवान श्रीराम जी के पुत्रों लव और कुश को महर्षि भगवान वाल्मीकि जी ने इसी पवित्र धरती पर शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान किया था।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस पवित्र स्थल पर नतमस्तक होने के अवसर को आध्यात्मिक संतुष्टि और सौभाग्य का विषय बताया।
तीर्थ स्थल के व्यापक विकास के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान भगवान वाल्मीकि तीर्थ स्थल पर विभिन्न विकास और सौंदर्यीकरण कार्यों के लिए 17.72 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। वर्ष 2024 में 25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार महर्षि भगवान वाल्मीकि जी के जीवन और शिक्षाओं को दर्शाने वाला भव्य पैनोरमा श्रद्धालुओं को समर्पित किया गया था। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि तीर्थ स्थल की सुंदरता बढ़ाने के लिए यहां आकर्षक फसाड लाइटिंग भी स्थापित की गई है, जिससे रात के समय यह पवित्र परिसर भव्य और दिव्य दिखाई देता है।




