अंबाला कैंट में करोड़ों रुपये की ठगी के एक बड़े मामले में रेलवे पुलिस और बिहार STF को बड़ी सफलता हाथ लगी है। संयुक्त कार्रवाई में एक संगठित ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बिहार के समस्तीपुर जिले से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में भाजपा का पूर्व जिला प्रवक्ता पंकज कुमार लाल भी शामिल है, जिसे पुलिस इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बता रही है। इस कार्रवाई ने न केवल अंबाला बल्कि कई अन्य राज्यों में फैले ठगी के नेटवर्क की ओर भी इशारा किया है।
रेलवे पुलिस के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब पंजाब निवासी जोशी नामक व्यक्ति ने अंबाला कैंट GRP थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनसे रुपये डबल करने और कर्ज पर भारी मुनाफा दिलाने का झांसा देकर करीब 1 करोड़ 90 लाख रुपये की ठगी की गई। शुरुआती जांच में सामने आया कि पीड़ित को आकर्षक रिटर्न का लालच देकर धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश के नाम पर ली गई और बाद में संपर्क तोड़ दिया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए GRP प्रभारी हरीश कुमार के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया। तकनीकी जांच, बैंक लेनदेन और कॉल डिटेल्स के आधार पर पुलिस की जांच बिहार के समस्तीपुर जिले तक पहुंची। इसके बाद अंबाला GRP और बिहार STF की संयुक्त टीम ने दलसिंहसराय अनुमंडल के अजनौल गांव में छापेमारी की। छापेमारी के दौरान मुख्य आरोपी पंकज कुमार लाल के साथ उसके दो सहयोगियों कौशल और रजनीश को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस जांच में सामने आया है कि पंकज कुमार लाल इस पूरे गिरोह का संचालन कर रहा था, जबकि उसके साथी कौशल और रजनीश भोले-भाले लोगों को झांसे में लेकर निवेश और रुपये डबल करने जैसी स्कीमों में फंसाते थे। आरोप है कि गिरोह ने नकली नोट डबलिंग और हाई रिटर्न स्कीमों का हवाला देकर कई लोगों से बड़ी रकम ऐंठी। पुलिस का मानना है कि यह सिर्फ एक मामला नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में फैले एक बड़े ठगी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
छापेमारी के दौरान पुलिस को आरोपियों की आलीशान कोठी, महंगी गाड़ियां और भारी मात्रा में नकदी व जेवरात मिले हैं, जिससे गिरोह की आर्थिक ताकत और ठगी के बड़े पैमाने की पुष्टि होती है। पुलिस ने मौके से करीब 6 लाख रुपये नकद, लगभग 30 लाख रुपये के सोने के आभूषण और एक सफेद रंग की लग्जरी इनोवा कार बरामद की है। इन बरामदगी से यह स्पष्ट होता है कि ठगी से हासिल की गई रकम को लग्जरी संपत्तियों में निवेश किया जा रहा था।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने प्रारंभिक स्तर पर कुछ अन्य साथियों और संपर्कों के बारे में जानकारी दी है। संभावना है कि इस गिरोह से जुड़े कई अन्य बड़े नामों का भी खुलासा हो सकता है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के तार किन-किन राज्यों से जुड़े हैं और अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया है।
रेलवे पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला केवल वित्तीय धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संगठित अपराध, फर्जी योजनाएं और लोगों की आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाने की साजिश भी शामिल है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपियों के राजनीतिक या अन्य प्रभावशाली संपर्कों का इस्तेमाल जांच से बचने या लोगों को प्रभावित करने के लिए किया गया था।
GRP और बिहार STF की इस संयुक्त कार्रवाई को एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इससे न केवल इस गिरोह पर शिकंजा कसा गया है, बल्कि ऐसे अन्य ठगी नेटवर्क के खिलाफ भी एक कड़ा संदेश गया है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे रुपये डबल करने, असामान्य रिटर्न या कर्ज पर भारी मुनाफे जैसी स्कीमों से सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें।
जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां तथा बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस का कहना है कि पीड़ितों की पहचान कर उन्हें न्याय दिलाने और ठगी की रकम की वसूली के लिए भी कानूनी प्रक्रिया तेज की जाएगी।




