पंजाब की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले घमासान तेज हो गया है और कांग्रेस से निष्कासन के बाद पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू लगातार पार्टी नेतृत्व पर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। हाल ही में उन्होंने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए कई सवाल दागे, जिनमें जिरकपुर में कथित रूप से 100 एकड़ जमीन खरीदने का मामला और सदस्यता शुल्क के नाम पर युवाओं से करोड़ों रुपये जुटाने का मुद्दा प्रमुख है। नवजोत कौर ने आरोप लगाया कि युवाओं से 75 रुपये सदस्यता शुल्क के जरिए बड़ी राशि एकत्र की गई और पूछा कि यह पैसा किस उद्देश्य से खर्च किया जाएगा, साथ ही यह भी दावा किया कि पंजाब के युवाओं का इस्तेमाल केवल राजनीतिक रैलियों और भीड़ जुटाने तक सीमित कर दिया गया है। उन्होंने राजा वारिंग को अदालत में जवाब देने की चुनौती देते हुए 2400 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का भी आरोप लगाया और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी, जिससे कांग्रेस के भीतर की खींचतान सार्वजनिक रूप से सामने आ गई है।
सियासी समीकरण को और दिलचस्प बनाते हुए नवजोत कौर सिद्धू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा और उन्हें जमीनी हकीकत से दूर बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें महीनों तक मिलने का समय नहीं दिया और पंजाब से जुड़े मुद्दों पर उनकी बात नहीं सुनी गई। नवजोत कौर का कहना है कि वह पार्टी के भीतर संगठनात्मक फैसलों और टिकट वितरण को लेकर गंभीर सवाल उठाना चाहती थीं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया गया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि चुनावी टिकटों के आवंटन में पारदर्शिता नहीं रही। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राहुल गांधी पर यह हमला ऐसे समय में आया है जब पंजाब में कांग्रेस अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है और आंतरिक असंतोष चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकता है।
नवजोत कौर सिद्धू पहले ही ऐलान कर चुकी हैं कि वह अमृतसर पूर्व सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरेंगी, जिसे कांग्रेस के लिए सीधी चुनौती माना जा रहा है। उनके बयानों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा और राहुल गांधी की आलोचना ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दी है, हालांकि उन्होंने औपचारिक रूप से किसी अन्य दल में शामिल होने की घोषणा नहीं की है। पंजाब चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर बढ़ता यह असंतोष पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है और विपक्षी दल इसे अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर सकते हैं। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि नवजोत कौर सिद्धू का यह आक्रामक रुख पंजाब की चुनावी राजनीति में कितना असर डालता है और क्या कांग्रेस इस अंदरूनी विवाद को सुलझा पाती है या नहीं।




