पंजाब में भाजपा का विस्तार तेज: सुखवंत सिंह सराओ और गुरविंदर सिंह भुटाल का शामिल होना मालवा की राजनीति में बड़ा संकेत

पंजाब की सियासत में तेजी से बदलते समीकरणों के बीच भारतीय जनता पार्टी को एक और महत्वपूर्ण बढ़त मिली है। शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष Sukhwant Singh Sarao ने पार्टी से इस्तीफा देकर अपने समर्थकों सहित भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। उनके साथ पूर्व अतिरिक्त उपायुक्त (विकास) Gurvinder Singh Bhutal भी भाजपा में शामिल हुए।

चंडीगढ़ में आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम के दौरान भाजपा के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष एवं विधायक Ashwani Kumar की मौजूदगी में दोनों नेताओं का पार्टी में स्वागत किया गया। भाजपा नेतृत्व ने इसे राज्य में संगठनात्मक विस्तार और मालवा क्षेत्र में राजनीतिक मजबूती की दिशा में अहम कदम बताया है।

सुखवंत सिंह सराओ का प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव उन्हें पंजाब की राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा बनाता है। Punjabi University से विधि स्नातक सराओ ने पंजाब सरकार में संगरूर में अतिरिक्त उपायुक्त (विकास) और ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग में उप निदेशक (पंचायत) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं। 30 सितंबर 2011 को उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर सक्रिय राजनीति का रुख किया।

वर्ष 2012 के पंजाब विधानसभा चुनाव में उन्होंने लहरा सीट से शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, जहां उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री Rajinder Kaur Bhattal से मात्र 3,345 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। उसी चुनाव में वर्तमान मुख्यमंत्री Bhagwant Mann तीसरे स्थान पर रहे थे। बाद के वर्षों में सराओ पंजाब लोक सेवा आयोग के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

सराओ की राजनीतिक यात्रा लंबे समय तक वरिष्ठ अकाली नेता Sukhdev Singh Dhindsa के साथ जुड़ी रही। जब ढींडसा ने अलग होकर नई राजनीतिक राह चुनी, तब सराओ भी उनके साथ खड़े रहे। बाद में उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) में वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाई। पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में उनकी भूमिका विशेष रूप से मालवा क्षेत्र में अहम मानी जाती रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सराओ का भाजपा में शामिल होना, खासकर गुरविंदर सिंह भुटाल जैसे प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाले नेता के साथ, मालवा बेल्ट में भाजपा की पकड़ को मजबूत कर सकता है। लहरा विधानसभा क्षेत्र में पार्टी आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

इस बीच, मीडिया से बातचीत में सुखवंत सिंह सराओ ने दावा किया कि वह आगामी चुनाव में भाजपा टिकट के मजबूत दावेदार हैं और लहरा सीट को जीत में बदलने को लेकर आश्वस्त हैं। उन्होंने कहा कि उनका क्षेत्र हिंदू बहुल है और लगभग 20 से 30 गांवों में हिंदू मतदाताओं की निर्णायक भूमिका है, जिससे भाजपा के लिए यह सीट जीतना संभव है।

उल्लेखनीय है कि सराओ का परिवार लंबे समय से क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके बड़े भाई Giani Niranjan Singh Bhutal भी लहरा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य भी धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े रहे हैं।

शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के लिए यह घटनाक्रम एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी पहले से ही अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के प्रयास में जुटी हुई है। वहीं भाजपा के लिए यह घटनाक्रम राज्य में संगठन विस्तार और नए सामाजिक समीकरण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत दे रहा है।