अटकलों पर विराम: संजीव अरोड़ा बोले—पार्टी में ही हूं, राजेंद्र गुप्ता की वापसी के संकेत

पंजाब की सियासत में जारी उठापटक के बीच बिजली मंत्री Sanjeev Arora ने स्पष्ट किया है कि वह आम आदमी पार्टी के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं और उनके पार्टी छोड़ने की चर्चाएं निराधार हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राज्यसभा सदस्य Rajinder Gupta के दोबारा पार्टी में लौटने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

मीडिया से बातचीत में अरोड़ा ने कहा कि पिछले करीब 68 महीनों से उनकी Raghav Chadha से कोई बातचीत नहीं हुई है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं लगाया जाना चाहिए कि पार्टी में कोई व्यक्तिगत या राजनीतिक दूरी है। उन्होंने इसे सामान्य राजनीतिक परिस्थितियों का हिस्सा बताया।

ईडी की हालिया कार्रवाई को लेकर भी अरोड़ा ने अपना पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वह किसी प्रकार के दबाव में नहीं हैं और जांच एजेंसियों से पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार, कार्रवाई के तुरंत बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट किया था कि वह जांच में हर संभव सहयोग देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कानून के दायरे में रहकर ही वह अपनी बात रखेंगे।

राजनीतिक हलकों में चल रही इस चर्चा पर कि अरोड़ा भी पार्टी छोड़ सकते हैं, उन्होंने सख्ती से विराम लगाया। उन्होंने कहा कि वह वर्तमान में पंजाब सरकार में मंत्री हैं और पूरी जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनका पार्टी छोड़ने का कोई इरादा नहीं है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अरोड़ा का यह बयान ऐसे समय आया है जब आम आदमी पार्टी को राज्यसभा स्तर पर कुछ झटके लगे हैं और विपक्ष लगातार पार्टी की आंतरिक स्थिति पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में उनका सामने आकर स्थिति स्पष्ट करना पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

अरोड़ा ने अप्रत्यक्ष रूप से यह भी संकेत दिया कि पार्टी के भीतर संवाद और समन्वय की प्रक्रिया जारी है और भविष्य में कई राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी नेतृत्व स्थिति पर पूरी तरह नजर बनाए हुए है और सभी फैसले संगठन के हित में लिए जाएंगे।

वहीं, उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि अदालतों और जांच एजेंसियों से जुड़े मामलों को राजनीतिक चश्मे से देखने की बजाय कानूनी प्रक्रिया के तहत ही समझा जाना चाहिए। उन्होंने Arvind Kejriwal के संदर्भ में कहा कि हर नेता अपने स्तर पर कानूनी विकल्पों का आकलन करता है और उसी के अनुसार निर्णय लेता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संजीव अरोड़ा का यह बयान न केवल उनकी व्यक्तिगत स्थिति स्पष्ट करता है, बल्कि आम आदमी पार्टी के लिए एक संदेश भी है कि अभी भी संगठन के भीतर स्थिरता बनाए रखने की कोशिश जारी है। साथ ही, राजेंद्र गुप्ता की संभावित वापसी का संकेत यह दर्शाता है कि पार्टी टूटन के बीच भी अपने समीकरणों को साधने में लगी हुई है।

पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में और बड़े बदलावों की आहट दे सकता है।