वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बढ़ाई योजना की अंतिम तिथि, बोले— मुकदमेबाज़ी नहीं, स्वैच्छिक कर-पालना ही मान सरकार की नीति
चंडीगढ़ — पंजाब की भगवंत मान सरकार ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि उसका शासन मॉडल टकराव और मुकदमेबाज़ी नहीं, बल्कि भरोसे, सहमति और सहयोग पर आधारित है। इसी नीति का प्रत्यक्ष उदाहरण बनकर सामने आई है ‘एकमुश्त निपटारा योजना-2025’ (ओ.टी.एस-2025), जिसे लेकर राज्य के वित्त, आबकारी एवं कराधान मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आज इसकी बड़ी सफलता का ऐलान किया।
वित्त मंत्री ने कहा कि ओ.टी.एस-2025 के तहत अब तक पंजाब सरकार को 110 करोड़ रुपये की प्रत्यक्ष वसूली हुई है, जबकि दूसरी ओर व्यापारियों और उद्योग जगत को 38,477 करोड़ रुपये की अभूतपूर्व कर राहत दी गई है। यह आंकड़े न सिर्फ योजना की स्वीकार्यता दर्शाते हैं, बल्कि यह भी साबित करते हैं कि जब सरकार व्यापारियों को सम्मान और सहूलियत देती है, तो राज्य का राजस्व भी स्वतः सशक्त होता है।
हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि 1 अक्टूबर 2025 को शुरू की गई इस योजना को जबरदस्त समर्थन मिला है। अब तक कर विभाग को 7,654 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो यह संकेत देते हैं कि व्यापारी वर्ग सरकार की नीयत और नीति दोनों पर भरोसा जता रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह सफलता मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में अपनाई गई उस सोच की जीत है, जिसमें सरकार पुराने विवादों को अदालतों में घसीटने की बजाय, उन्हें सम्मानजनक और पारदर्शी ढंग से सुलझाने को प्राथमिकता देती है।
राजनीतिक संदेश भी साफ
इस मौके पर वित्त मंत्री के बयान में राजनीतिक संदेश भी स्पष्ट झलकता है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के दौर में कर नीति डर और दबाव का साधन बन गई थी, जबकि मौजूदा सरकार कर-प्रणाली को विश्वास और सहभागिता का माध्यम बना रही है। चीमा ने कहा कि ओ.टी.एस-2025 केवल राजस्व जुटाने की योजना नहीं है, बल्कि यह पंजाब सरकार की उस सोच का प्रतीक है, जो व्यापार को राज्य के विकास का साझेदार मानती है।
उद्योग जगत की मांग पर बढ़ी अंतिम तिथि
औद्योगिक संगठनों और व्यापारिक प्रतिनिधियों की मांग को स्वीकार करते हुए सरकार ने ओ.टी.एस-2025 की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 से बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर दी है। वित्त मंत्री ने कहा कि योजना की सकारात्मक प्रतिक्रिया और उद्योग जगत की अपीलों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, ताकि अधिक से अधिक योग्य करदाता इस योजना का लाभ उठा सकें।
उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई समय-सीमा करदाताओं को अपनी देनदारियों का पुनर्मूल्यांकन करने और बिना किसी जटिल प्रक्रिया के पारदर्शी ढंग से निपटान करने का पूरा अवसर देगी। यह कदम मान सरकार की उस छवि को और मजबूत करता है, जिसमें वह उद्योग-विरोधी नहीं, बल्कि उद्योग-सहयोगी सरकार के रूप में सामने आ रही है।
100 प्रतिशत ब्याज और जुर्माने में छूट
ओ.टी.एस-2025 की सबसे बड़ी विशेषता इसकी उदार छूट नीति है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि योजना के तहत सभी श्रेणियों में ब्याज और जुर्माने पर 100 प्रतिशत छूट दी जा रही है, जिससे वर्षों से चले आ रहे कर विवादों का बोझ व्यापारियों के कंधों से उतर रहा है।
इसके अलावा मूल कर राशि में भी स्लैब-आधारित बड़ी राहत दी गई है। 1 करोड़ रुपये तक के बकाया पर 50 प्रतिशत की छूट, 1 करोड़ से 25 करोड़ रुपये तक के बकाया पर 25 प्रतिशत की छूट और 25 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया पर 10 प्रतिशत की छूट का प्रावधान किया गया है। यही राहत पंजाब जनरल सेल्स टैक्स एक्ट 1948 की धारा 14-बी और पंजाब वैट एक्ट 2005 की धारा 51 के मामलों में भी लागू की गई है।
‘सुविधा भी, अनुशासन भी’
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार जहां व्यापारियों को अधिकतम सहूलियत देने के लिए प्रतिबद्ध है, वहीं व्यवस्था में अनुशासन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जो योग्य करदाता इस योजना का लाभ उठाकर अपने पुराने बकाया निपटाते हैं, उनका सरकार स्वागत करती है, लेकिन जो इस अवसर के बावजूद जानबूझकर कर-पालना से बचते हैं, उनके खिलाफ कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने सभी योग्य करदाताओं से अपील की कि वे ओ.टी.एस-2025 का लाभ उठाकर न केवल अपने पुराने विवाद समाप्त करें, बल्कि पंजाब के विकास में सहभागी बनें।
आवेदन प्रक्रिया सरल
हरपाल सिंह चीमा ने जानकारी दी कि सरकारी अनाज एजेंसियों को छोड़कर शेष सभी करदाता स्टेट टैक्स के सहायक आयुक्त (ए.सी.एस.टी.) के कार्यालय में फॉर्म ओ.टी.एस-01 जमा कर इस योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आवेदन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध रखा गया है।
कुल मिलाकर, ओ.टी.एस-2025 भगवंत मान सरकार की उस राजनीतिक-प्रशासनिक सोच को रेखांकित करती है, जिसमें कर नीति को दंड नहीं, बल्कि विकास का औजार बनाया जा रहा है। यह योजना न केवल पंजाब के व्यापारिक माहौल को नया भरोसा दे रही है, बल्कि आने वाले समय में राज्य की आर्थिक सेहत को भी मजबूती प्रदान करती नजर आ रही है।




