गुरप्रीत सिंह सेखों की AAP में एंट्री पर सियासी घमासान, विपक्ष ने भगवंत मान सरकार को घेरा


पंजाब की राजनीति में अपराध और राजनीति के रिश्ते को लेकर बहस उस समय तेज हो गई जब  गुरप्रीत सिंह सेखों के आम आदमी पार्टी में शामिल होने की खबर सामने आई। मुख्यमंत्री भगवंत मान की मौजूदगी में उनके AAP में आने को लेकर कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
सेखों का नाम अतीत में कई आपराधिक मामलों से जुड़ा रहा है और उन्हें 2016 की नाभा जेलब्रेक घटना से भी जोड़ा गया था। हालांकि, उनके बारे में मौजूदा स्थिति और पुराने मामलों की कानूनी स्थिति को अलग-अलग देखना जरूरी है। सेखों की ओर से यह कहा गया है कि उन्होंने अपराध की राह छोड़ दी है और समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं।
AAP की ओर से इसे राजनीतिक और सामाजिक मुख्यधारा में वापसी के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन विपक्ष ने सवाल उठाया है कि यदि सरकार अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ सख्त अभियान चला रही है, तो ऐसे व्यक्ति का राजनीतिक दल में प्रवेश क्या संदेश देता है।
कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को सरकार के ‘गैंगस्टर विरोधी अभियान’ के दावों से जोड़ते हुए हमला बोला है। विपक्ष का कहना है कि राजनीति में प्रवेश का रास्ता उन लोगों के लिए नहीं खुलना चाहिए जिनका अतीत संगठित अपराध से जुड़ा रहा हो।
AAP के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ सरकार को यह साबित करना होगा कि अपराध के खिलाफ उसकी कार्रवाई किसी राजनीतिक पहचान से प्रभावित नहीं होती, वहीं दूसरी ओर पार्टी को यह भी स्पष्ट करना होगा कि किसी व्यक्ति के राजनीतिक मुख्यधारा में आने से पहले उसकी पृष्ठभूमि और कानूनी स्थिति की पर्याप्त जांच किस स्तर तक की जाती है।
पंजाब में गैंगस्टर और संगठित अपराध लंबे समय से राजनीतिक मुद्दे रहे हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह की घटनाएं विपक्ष को सरकार के खिलाफ नया राजनीतिक हथियार दे सकती हैं।