पंजाब में नशे का मुद्दा फिर गरमाया, गुलजार सिंह की मौत ने AAP सरकार को घेरा

चंडीगढ़/संगरूर। पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। संगरूर के गुलजार सिंह की मौत के बाद विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी सरकार पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि राज्य में नशे की समस्या पर सरकार के दावों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर दिखाई दे रहा है।
गुलजार सिंह की मौत का मामला उस समय राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया जब उनके परिवार और स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने गांव में नशे की उपलब्धता और इससे जुड़े सामाजिक संकट का मुद्दा उठाया था। मामले में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है और जांच आगे बढ़ रही है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मामले को लेकर पंजाब सरकार पर सवाल उठाए हैं और स्वतंत्र जांच की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को डर या दबाव का सामना नहीं करना चाहिए।
सरकार की ओर से नशे के खिलाफ लगातार कार्रवाई का दावा किया जाता रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा कई मौकों पर कह चुके हैं कि नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। सरकार का जोर नशा तस्करों की संपत्तियों पर कार्रवाई और नेटवर्क को तोड़ने पर भी रहा है।

लेकिन विपक्ष का तर्क है कि केवल गिरफ्तारियों और संपत्ति जब्ती के आंकड़ों से नशे की समस्या समाप्त नहीं होगी। उसका कहना है कि जब तक गांवों और शहरों में नशे की उपलब्धता पर प्रभावी रोक नहीं लगती, तब तक सरकारी अभियान की सफलता पर सवाल उठते रहेंगे।
गुलजार सिंह की मौत ने इसी बहस को और तीखा कर दिया है। अब जांच एजेंसियों के सामने यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि उनकी मौत की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और क्या उन्हें नशे का मुद्दा उठाने के कारण किसी तरह के दबाव या उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
राजनीतिक रूप से यह मामला AAP सरकार के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने नशे के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का वादा किया था। 2027 के चुनाव में विपक्ष इसी वादे को सरकार के प्रदर्शन की कसौटी बनाने की तैयारी में है।