पंजाब चुनाव को लेकर तस्वीर साफ, 2027 से पहले राजनीतिक दलों ने तेज की तैयारी

पंजाब में विधानसभा चुनाव को लेकर समय से पहले चुनाव की अटकलों पर अब काफी हद तक विराम लगता दिखाई दे रहा है। जनगणना-2027 की प्रक्रिया के लिए केंद्र की ओर से तय कार्यक्रम के बाद राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों को चुनावी तैयारियों के लिए अपेक्षाकृत अधिक समय मिलने की संभावना है। ऐसे में आम आदमी पार्टी सरकार के साथ-साथ कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल ने भी अपनी राजनीतिक रणनीति को नए सिरे से धार देना शुरू कर दिया है।
भगवंत मान सरकार के लिए यह समय अपने कार्यकाल के कामकाज को जनता के सामने रखने का है। सरकार रोजगार, मुफ्त बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासनिक सुधारों को अपनी प्रमुख उपलब्धियों के रूप में पेश कर रही है। वहीं विपक्ष सरकार के सामने नशे, कानून-व्यवस्था, वित्तीय स्थिति और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दे रख रहा है।
2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर पंजाब की राजनीति में बड़ा बदलाव किया था। कांग्रेस और अकाली दल के लंबे राजनीतिक प्रभाव के बीच AAP को मिला यह जनादेश पारंपरिक राजनीति के खिलाफ मतदाताओं की नाराजगी के रूप में भी देखा गया था।
अब पांच साल की सरकार का कार्यकाल पूरा होने की ओर है और राजनीतिक परिस्थितियां 2022 से काफी अलग हैं। उस समय AAP के पक्ष में सत्ता विरोधी भावना नहीं थी, जबकि 2027 में पार्टी को अपने ही शासन के रिकॉर्ड का जवाब देना होगा।
कांग्रेस इस समय सरकार के खिलाफ नशे और कानून-व्यवस्था को प्रमुख मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। भाजपा भी पंजाब में अपने संगठनात्मक विस्तार पर जोर दे रही है, जबकि अकाली दल अपने पारंपरिक राजनीतिक आधार को फिर से मजबूत करने की कोशिश में है।
ऐसे में आने वाले महीनों में पंजाब की राजनीति में मुद्दों के साथ-साथ उम्मीदवारों, गठबंधनों और सीटों के समीकरण भी तेजी से महत्वपूर्ण होंगे। 2027 का चुनाव यह तय करेगा कि 2022 में ‘बदलाव’ के नाम पर मिला AAP का ऐतिहासिक जनादेश क्या अगले कार्यकाल में भी जनता का विश्वास हासिल कर पाता है।