पंजाब विधानसभा की कार्यवाही कल तक स्थगित, छह दिवसीय विशेष सत्र में नशे, कानून-व्यवस्था और किसानों के मुद्दों पर रहेगा फोकस

चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा के छह दिवसीय विशेष सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। गुरुवार को सत्र की शुरुआत दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। आने वाले दिनों में सदन में नशे के कारोबार, कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार के आरोपों, किसानों की समस्याओं और पंजाब के नदी जल पर अधिकार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने की संभावना है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार के लिए यह सत्र अपने कामकाज और नीतियों का पक्ष रखने का अवसर होगा। वहीं, विपक्षी दल नशे की समस्या, नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परमिंदर सिंह झोटा की हत्या और राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार से जवाब मांग सकते हैं।

नशे के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने

सत्र के दौरान नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ पर विशेष चर्चा होने की संभावना है। सरकार इस अभियान के तहत की गई कार्रवाई और नशा तस्करी पर लगाम लगाने के प्रयासों को सामने रख सकती है। आम आदमी पार्टी का रुख रहा है कि पंजाब में नशे की समस्या के लिए पिछली सरकारों की भूमिका की भी जांच और समीक्षा होनी चाहिए। साथ ही, सीमापार तस्करी और बंदरगाहों के जरिए होने वाली नशीले पदार्थों की आपूर्ति रोकने में केंद्र की जिम्मेदारी का मुद्दा भी उठाया जा सकता है।

दूसरी ओर, कांग्रेस सहित विपक्षी दल नशे के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकार की भूमिका पर सवाल उठा सकते हैं। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा पहले ही संकेत दे चुके हैं कि उनकी पार्टी कानून-व्यवस्था के मुद्दे को सदन में प्रमुखता से उठाएगी।

परमिंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला भी सत्र के दौरान राजनीतिक बहस का अहम केंद्र बन सकता है। झोटा मानसा क्षेत्र में नशे के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे। उनकी हत्या के बाद नशे के कथित अवैध कारोबार और ऐसे मामलों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठे हैं। पंजाब सरकार ने परिवार की मांग के बाद मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की घोषणा की थी। विपक्ष इस मामले में जवाबदेही की मांग कर सकता है, जबकि सरकार निष्पक्ष जांच और नशा विरोधी कार्रवाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित कर सकती है।

किसानों और पंजाब के नदी जल अधिकारों पर भी नजर

विशेष सत्र में किसानों से जुड़े मुद्दे भी अहम रहेंगे। सरकार पंजाब के नदी जल पर राज्य के अधिकारों से संबंधित प्रस्ताव सदन में ला सकती है। इसके साथ ही, राज्य के हितों को प्रभावित करने वाले प्रावधानों पर पुनर्विचार और बांध सुरक्षा अधिनियम को निरस्त करने की मांग से जुड़े विषय भी एजेंडे में रहने की संभावना है।

सरकार अपनी फसल खरीद व्यवस्था और किसानों के हित में उठाए गए कदमों को भी सदन में सामने रख सकती है। इन मुद्दों के जरिए सत्तापक्ष यह बताने का प्रयास कर सकता है कि कृषि क्षेत्र, किसानों की आर्थिक स्थिति और पंजाब के अधिकार उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

सत्र के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपों और सरकारी कामकाज को लेकर भी सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिल सकता है। इसके अतिरिक्त, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव लाने की संभावना भी चर्चा में है। महिलाओं के लिए किसी नई राहत की घोषणा को लेकर भी राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर नजर बनी हुई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि और विवरण सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

पहले दिन दिवंगत हस्तियों को दी गई श्रद्धांजलि

सत्र के पहले दिन सदन ने विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली दिवंगत हस्तियों और सड़क हादसे में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इनमें पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री चुन्नी लाल भगत, पूर्व राज्यसभा सदस्य वरिंदर सिंह बाजवा, पूर्व विधायक रणजीत सिंह और पद्मश्री डॉ. रतन लाल मित्तल शामिल थे। सदन ने नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परमिंदर सिंह झोटा को भी याद किया।

इसके अलावा संगरूर में सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले मनरेगा के आठ सदस्यों के निधन पर भी शोक व्यक्त किया गया।

श्रद्धांजलि संबंधी कार्यवाही पूरी होने के बाद विधानसभा को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया। अब अगले दिनों में सदन की कार्यवाही के दौरान सरकार के विधायी एजेंडे और विपक्ष के सवालों के बीच पंजाब के राजनीतिक माहौल में और गर्मी आने की संभावना है।