अमृतसर में अवैध हथियारों के नेटवर्क का भंडाफोड़, आठ पिस्तौल और 103 कारतूस बरामद; दो गिरफ्तार


अमृतसर, कुमार सोनी। अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने अवैध हथियारों की तस्करी और सप्लाई से जुड़े एक नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से .30 बोर की आठ अवैध पिस्तौल और 103 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में आरोपियों के विदेशी हथियार तस्करों से संपर्क होने की बात सामने आई है।

पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तरनतारन जिले के गांव बैंका निवासी 24 वर्षीय रणजीत सिंह उर्फ जीता और गांव तारा सिंह निवासी 32 वर्षीय गुरबीर सिंह उर्फ गोरा के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, रणजीत सिंह का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड है और उसके खिलाफ शस्त्र अधिनियम, एनडीपीएस अधिनियम तथा विस्फोटक अधिनियम के तहत मामले दर्ज हैं।

पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में दोनों आरोपियों के सोशल मीडिया एप्लिकेशन के माध्यम से विदेश में बैठे हथियार तस्करों के संपर्क में होने के संकेत मिले हैं। आरोप है कि वे विदेश से आने वाली अवैध हथियारों की खेप हासिल करने के बाद उन्हें पंजाब में आपराधिक गतिविधियों से जुड़े लोगों तक पहुंचाते थे। हालांकि, इन आरोपों की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

पुलिस के अनुसार, कार्रवाई की शुरुआत एक गुप्त सूचना के आधार पर हुई। अमृतसर पुलिस ने गुरुद्वारा बोहड़ी साहिब रोड के पास नाका लगाया, जहां रणजीत सिंह उर्फ जीता को पकड़ा गया। उसके पास से एक .30 बोर पिस्तौल और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए। इसके बाद पूछताछ और आगे की जांच के दौरान पुलिस ने उसके कब्जे से चार और .30 बोर पिस्तौल तथा 100 जिंदा कारतूस बरामद करने का दावा किया। इस तरह रणजीत सिंह से कुल पांच पिस्तौल और 103 कारतूस बरामद हुए।

पूछताछ के दौरान पुलिस को उसके कथित साथी गुरबीर सिंह उर्फ गोरा के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, गुरबीर के कब्जे से तीन .30 बोर पिस्तौल बरामद की गईं। जांच में यह भी सामने आया कि गुरबीर सिंह करीब छह महीने पहले दुबई से भारत लौटा था।

इस मामले को महज हथियार बरामदगी तक सीमित न रखते हुए पुलिस अब कथित पूरे सप्लाई नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि हथियारों की खेप कहां से आती थी, उन्हें पंजाब तक पहुंचाने में कौन लोग शामिल थे और गिरफ्तार आरोपियों ने अब तक कितने हथियार आगे सप्लाई किए हैं। संभावित सीमा-पार संपर्कों और विदेश में बैठे तस्करों के साथ उनके संबंधों की भी जांच की जा रही है।

पुलिस विशेष रूप से नेटवर्क के ‘बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंक’ खंगाल रही है। इसका मतलब हथियारों के स्रोत से लेकर उन्हें प्राप्त करने वालों तक पूरी श्रृंखला का पता लगाना है। जांचकर्ताओं के सामने यह भी अहम सवाल है कि बरामद हथियारों की संभावित डिलीवरी किन आपराधिक तत्वों या गिरोहों तक होनी थी।

मामले में अमृतसर कमिश्नरेट के थाना इस्लामाबाद में एफआईआर संख्या 264, दिनांक 30 अगस्त 2026 दर्ज की गई है। पुलिस ने शस्त्र अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई है।

यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब पंजाब पुलिस राज्य में अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। अमृतसर क्षेत्र में पिछले कुछ समय में हथियार और ड्रग तस्करी से जुड़े कई मॉड्यूल के खिलाफ कार्रवाई की गई है। ऐसे मामलों में पुलिस के लिए केवल हथियार बरामद करना ही नहीं, बल्कि उनके पीछे काम कर रहे वित्तीय, डिजिटल और आपराधिक नेटवर्क तक पहुंचना बड़ी चुनौती बनी हुई है।

अमृतसर पुलिस का ताजा ऑपरेशन इसी व्यापक जांच का हिस्सा माना जा रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस कथित हथियार सप्लाई नेटवर्क में कितने और लोगों तक पहुंच पाती है और क्या जांच से किसी बड़े संगठित या सीमा-पार हथियार तस्करी तंत्र का खुलासा होता है।